धरातुरासाहि मदर्थयाच्ञा
कार्या न कार्यान्तरचुम्बिचित्ते ।
तदार्थितस्यानवबोधनिद्रा
बिभर्त्यवज्ञाचरणस्य मुद्राम् ॥
धरातुरासाहि मदर्थयाच्ञा
कार्या न कार्यान्तरचुम्बिचित्ते ।
तदार्थितस्यानवबोधनिद्रा
बिभर्त्यवज्ञाचरणस्य मुद्राम् ॥
कार्या न कार्यान्तरचुम्बिचित्ते ।
तदार्थितस्यानवबोधनिद्रा
बिभर्त्यवज्ञाचरणस्य मुद्राम् ॥
अन्वयः
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धरा-तुरासाहि (नृपे) कार्य-अन्तर-चुम्बि-चित्ते (सति) मत्-अर्थ-याच्ञा न कार्या। (यतः) तत्-अर्थितस्य अनवबोध-निद्रा अवज्ञा-आचरणस्य मुद्राम् बिभर्ति।
Summary
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"A request on my behalf should not be made to that Indra on earth (Nala) when his mind is occupied with other affairs. For, the sleep of inattention to a request made at such a time bears the imprint of an act of contempt."
पदच्छेदः
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| धरातुरासाहि | धरा–तुराषाट् (७.१) | to the Indra of the earth (Nala) |
| मदर्थयाच्ञा | अस्मद्–अर्थ–याच्ञा (१.१) | a request for my sake |
| कार्या | कार्य (√कृ+ण्यत्, १.१) | to be made |
| न | न | not |
| कार्यान्तरचुम्बिचित्ते | कार्य–अन्तर–चुम्बिन्–चित्त (७.१) | when his mind is occupied with other matters |
| तदार्थितस्य | तदा–अर्थित (√अर्थ्+क्त, ६.१) | of a request made then |
| अनवबोधनिद्रा | नञ्–अवबोध–निद्रा (१.१) | the sleep of inattention |
| बिभर्ति | बिभर्ति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bears |
| अवज्ञाचरणस्य | अवज्ञा–आचरण (६.१) | of the act of contempt |
| मुद्राम् | मुद्रा (२.१) | the imprint |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध | रा | तु | रा | सा | हि | म | द | र्थ | या | च्ञा |
| का | र्या | न | का | र्या | न्त | र | चु | म्बि | चि | त्ते |
| त | दा | र्थि | त | स्या | न | व | बो | ध | नि | द्रा |
| बि | भ | र्त्य | व | ज्ञा | च | र | ण | स्य | मु | द्राम् |
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