त्वया विधेया न गिरो मदर्थाः
क्रुधा कदुष्णे हृदि नैषधस्य ।
पित्तेन दूने रसने सितापि
तिक्तायते हंसकुलावतंस ॥
त्वया विधेया न गिरो मदर्थाः
क्रुधा कदुष्णे हृदि नैषधस्य ।
पित्तेन दूने रसने सितापि
तिक्तायते हंसकुलावतंस ॥
क्रुधा कदुष्णे हृदि नैषधस्य ।
पित्तेन दूने रसने सितापि
तिक्तायते हंसकुलावतंस ॥
अन्वयः
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(हे) हंस-कुल-अवतंस! त्वया नैषधस्य क्रुधा कदुष्णे हृदि मत्-अर्थाः गिरः न विधेयाः। पित्तेन दूने रसने सिता अपि तिक्तायते।
Summary
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"O crest-jewel of the swan lineage! You should not speak words on my behalf to Nala when his heart is heated with anger. For, to a tongue afflicted by bile, even sugar tastes bitter."
पदच्छेदः
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| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| विधेयाः | विधेय (वि√धा+यत्, १.३) | to be spoken |
| न | न | not |
| गिरः | गिर् (१.३) | words |
| मदर्थाः | मदर्थ (१.३) | for my sake |
| क्रुधा | क्रुध् (३.१) | with anger |
| कदुष्णे | कदुष्ण (७.१) | heated |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| नैषधस्य | नैषध (६.१) | of Nala |
| पित्तेन | पित्त (३.१) | by bile |
| दूने | दून (√दू+क्त, ७.१) | afflicted |
| रसने | रसन (७.१) | on the tongue |
| सिता | सिता (१.१) | sugar |
| अपि | अपि | even |
| तिक्तायते | तिक्तायते (√तिक्ताय कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | tastes bitter |
| हंसकुलावतंस | हंस–कुल–अवतंस (८.१) | O crest-jewel of the swan lineage! |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्व | या | वि | धे | या | न | गि | रो | म | द | र्थाः |
| क्रु | धा | क | दु | ष्णे | हृ | दि | नै | ष | ध | स्य |
| पि | त्ते | न | दू | ने | र | स | ने | सि | ता | पि |
| ति | क्ता | य | ते | हं | स | कु | ला | व | तं | स |
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