अभ्यर्थनीयः स गतेन राजा
त्वया न शुद्धान्तगतो मदर्थम् ।
प्रियास्यदाक्षिण्यवलात्कृतो हि
तदोदयेदन्यवधूनिषेधः ॥
अभ्यर्थनीयः स गतेन राजा
त्वया न शुद्धान्तगतो मदर्थम् ।
प्रियास्यदाक्षिण्यवलात्कृतो हि
तदोदयेदन्यवधूनिषेधः ॥
त्वया न शुद्धान्तगतो मदर्थम् ।
प्रियास्यदाक्षिण्यवलात्कृतो हि
तदोदयेदन्यवधूनिषेधः ॥
अन्वयः
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त्वया गतेन शुद्धान्त-गतः सः राजा मत्-अर्थम् न अभ्यर्थनीयः। हि तदा प्रिया-आस्य-दाक्षिण्य-बलात्-कृतः (सन्) अन्य-वधू-निषेधः उदयेत्।
Summary
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"You should not go and request that king on my behalf when he is in the harem. Because at that time, compelled by courtesy towards his beloved's face, a prohibition against mentioning any other woman might arise."
पदच्छेदः
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| अभ्यर्थनीयः | अभ्यर्थनीय (अभि√अर्थ्+अनीयर्, १.१) | to be requested |
| सः | तद् (१.१) | that |
| गतेन | गत (√गम्+क्त, ३.१) | having gone |
| राजा | राजन् (१.१) | king |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| न | न | not |
| शुद्धान्तगतः | शुद्धान्त–गत (√गम्+क्त, १.१) | who is in the harem |
| मदर्थम् | मदर्थम् | for my sake |
| प्रियास्यदाक्षिण्यबलात्कृतः | प्रिया–आस्य–दाक्षिण्य–बलात्कृत (√कृ+च्वि+क्त, १.१) | compelled by courtesy to his beloved's face |
| हि | हि | because |
| तदा | तदा | then |
| उदयेत् | उदयेत् (उद्√इ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | might arise |
| अन्यवधूनिषेधः | अन्य–वधू–निषेध (१.१) | the prohibition of another woman |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भ्य | र्थ | नी | यः | स | ग | ते | न | रा | जा |
| त्व | या | न | शु | द्धा | न्त | ग | तो | म | द | र्थम् |
| प्रि | या | स्य | दा | क्षि | ण्य | व | ला | त्कृ | तो | हि |
| त | दो | द | ये | द | न्य | व | धू | नि | षे | धः |
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