तदेकलुब्धे हृदि मेऽस्ति लब्धुं
चिन्ता न चिन्तामणिमप्यनर्ष्यम् ।
चित्ते ममैकः सकलत्रिलोकी-
सारो निधिः पद्ममुखः स एव ॥
तदेकलुब्धे हृदि मेऽस्ति लब्धुं
चिन्ता न चिन्तामणिमप्यनर्ष्यम् ।
चित्ते ममैकः सकलत्रिलोकी-
सारो निधिः पद्ममुखः स एव ॥
चिन्ता न चिन्तामणिमप्यनर्ष्यम् ।
चित्ते ममैकः सकलत्रिलोकी-
सारो निधिः पद्ममुखः स एव ॥
अन्वयः
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मे तत् एक लुब्धे हृदि अनर्ष्यम् चिन्तामणिम् अपि लब्धुम् चिन्ता न अस्ति । मम चित्ते सकल त्रिलोकी सारः निधिः सः पद्ममुखः एकः एव (अस्ति) ।
Summary
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"In my heart, which is greedy for him alone, there is no desire to obtain even the priceless wish-fulfilling gem. In my mind, that lotus-faced one is the single treasure, the very essence of all three worlds."
पदच्छेदः
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| तत् | तद् (७.१) | for him |
| एक | एक | alone |
| लुब्धे | लुब्ध (√लुभ्+क्त, ७.१) | which is greedy |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| मे | अस्मद् (६.१) | my |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | there is |
| लब्धुम् | लब्धुम् (√लभ्+तुमुन्) | to obtain |
| चिन्ता | चिन्ता (१.१) | desire |
| न | न | no |
| चिन्तामणिम् | चिन्तामणि (२.१) | the wish-fulfilling gem |
| अपि | अपि | even |
| अनर्ष्यम् | अनर्ष्य (२.१) | the priceless |
| । | । | . |
| चित्ते | चित्त (७.१) | In the mind |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| एकः | एक (१.१) | the one |
| सकलत्रिलोकीसारः | सकल–त्रिलोकी–सार (१.१) | essence of all three worlds |
| निधिः | निधि (१.१) | treasure |
| पद्ममुखः | पद्ममुख (१.१) | the lotus-faced one |
| सः | तद् (१.१) | he |
| एव | एव | alone |
| ॥ | ॥ | . |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | दे | क | लु | ब्धे | हृ | दि | मे | ऽस्ति | ल | ब्धुं |
| चि | न्ता | न | चि | न्ता | म | णि | म | प्य | न | र्ष्यम् |
| चि | त्ते | म | मै | कः | स | क | ल | त्रि | लो | की |
| सा | रो | नि | धिः | प | द्म | मु | खः | स | ए | व |
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