धृताल्पकोपा हसिते सखीनां
छायेव भास्वन्तमभिप्रयातुः ।
श्यामाथ हंसस्य करानवाप्तेः
मन्दाक्षलक्ष्या लगति स्म पश्चात् ॥
धृताल्पकोपा हसिते सखीनां
छायेव भास्वन्तमभिप्रयातुः ।
श्यामाथ हंसस्य करानवाप्तेः
मन्दाक्षलक्ष्या लगति स्म पश्चात् ॥
छायेव भास्वन्तमभिप्रयातुः ।
श्यामाथ हंसस्य करानवाप्तेः
मन्दाक्षलक्ष्या लगति स्म पश्चात् ॥
अन्वयः
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अथ सखीनाम् हसिते (सति), श्यामा धृत-अल्प-कोपा, हंसस्य कर-अनवाप्तेः मन्दाक्ष-लक्ष्या (सती), भास्वन्तम् अभिप्रयातुः छाया इव पश्चात् लगति स्म।
Summary
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Then, at her friends' laughter, Damayanti, showing slight anger and visibly embarrassed by her failure to catch the swan, followed behind it, just as a shadow follows someone walking towards the sun.
पदच्छेदः
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| धृत-अल्प-कोपा | धृत (√धृ+क्त)–अल्प–कोप | she who held a little anger |
| हसिते | हसित (७.१) | at the laughter |
| सखीनाम् | सखी (६.३) | of the friends |
| छाया | छाया (१.१) | a shadow |
| इव | इव | like |
| भास्वन्तम् | भास्वत् (२.१) | the sun |
| अभिप्रयातुः | अभिप्रयात् (अभि+प्र√या+शतृ, ६.१) | of one going towards |
| श्यामा | श्यामा (१.१) | the young lady (Damayanti) |
| अथ | अथ | then |
| हंसस्य | हंस (६.१) | of the swan |
| कर-अनवाप्तेः | कर–अनवाप्ति (५.१) | from the failure to obtain by hand |
| मन्दाक्ष-लक्ष्या | मन्दाक्ष–लक्ष्य | visibly embarrassed |
| लगति स्म | लगति (√लग् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.)–स्म | followed |
| पश्चात् | पश्चात् | behind |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धृ | ता | ल्प | को | पा | ह | सि | ते | स | खी | नां |
| छा | ये | व | भा | स्व | न्त | म | भि | प्र | या | तुः |
| श्या | मा | थ | हं | स | स्य | क | रा | न | वा | प्तेः |
| म | न्दा | क्ष | ल | क्ष्या | ल | ग | ति | स्म | प | श्चात् |
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