उच्चाटनीयः करतालिकानां
दानादिदानीं भवतीभिरेषः ।
यान्वेति मां दुह्यति मह्ममेव
सात्रेत्युपालम्भि तयालिवर्गः ॥
उच्चाटनीयः करतालिकानां
दानादिदानीं भवतीभिरेषः ।
यान्वेति मां दुह्यति मह्ममेव
सात्रेत्युपालम्भि तयालिवर्गः ॥
दानादिदानीं भवतीभिरेषः ।
यान्वेति मां दुह्यति मह्ममेव
सात्रेत्युपालम्भि तयालिवर्गः ॥
अन्वयः
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(दमयन्ती आह) "भवतीभिः इदानीम् करतालिकानाम् दानात् एषः उच्चाटनीयः। या माम् अनु एति, सा अत्र मह्यम् एव दुह्यति।" इति तया आलिवर्गः उपालम्भि।
Summary
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Damayanti reproached her group of friends, saying, "Now, by your clapping, this swan is to be driven away. The one who follows me (you, my friend) is here harming me."
पदच्छेदः
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| उच्चाटनीयः | उच्चाटनीय (उद्√चट्+णिच्+अनीयर्, १.१) | is to be driven away |
| करतालिकानाम् | करतालिका (६.३) | of the hand-claps |
| दानात् | दान (५.१) | by the giving |
| इदानीम् | इदानीम् | now |
| भवतीभिः | भवत् (३.३) | by you (ladies) |
| एषः | एतद् (१.१) | this one |
| या | यद् (१.१) | she who |
| अनु एति | एति (अनु√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | follows |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| दुह्यति | दुह्यति (√द्रुह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | harms |
| मह्यम् | अस्मद् (४.१) | to me |
| एव | एव | indeed |
| सा | तद् (१.१) | she |
| अत्र | अत्र | here |
| इति | इति | thus |
| उपालम्भि | उपालम्भि (उप+आ√लभ् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was reproached |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| आलिवर्गः | आलिवर्ग (१.१) | the group of friends |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | च्चा | ट | नी | यः | क | र | ता | लि | का | नां |
| दा | ना | दि | दा | नीं | भ | व | ती | भि | रे | षः |
| या | न्वे | ति | मां | दु | ह्य | ति | म | ह्म | मे | व |
| सा | त्रे | त्यु | पा | ल | म्भि | त | या | लि | व | र्गः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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