श्रवःप्रविष्टा इव तद्गिरस्ता
विधूय वैमत्यधुतेन मूर्ध्ना ।
ऊचे ह्रियोऽपि श्लथितानुरोधा
पुनर्धरित्रीपुरुहूतपुत्री ॥
श्रवःप्रविष्टा इव तद्गिरस्ता
विधूय वैमत्यधुतेन मूर्ध्ना ।
ऊचे ह्रियोऽपि श्लथितानुरोधा
पुनर्धरित्रीपुरुहूतपुत्री ॥
विधूय वैमत्यधुतेन मूर्ध्ना ।
ऊचे ह्रियोऽपि श्लथितानुरोधा
पुनर्धरित्रीपुरुहूतपुत्री ॥
अन्वयः
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धरित्रीपुरुहूतपुत्री ताः तत् गिरः श्रवः प्रविष्टाः इव (मन्यमाना), वैमत्य धुतेन मूर्ध्ना विधूय, ह्रियः अपि श्लथित अनुरोधा (सती) पुनः ऊचे ।
Summary
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The princess, as if those words of his had only just entered her ears, shook her head in disagreement. With her regard for modesty now loosened, she spoke again.
पदच्छेदः
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| श्रवः | श्रवस् (२.१) | the ear |
| प्रविष्टाः | प्रविष्ट (प्र√विश्+क्त, १.३) | entered |
| इव | इव | as if |
| तत् | तद् (६.१) | his |
| गिरः | गिर् (१.३) | words |
| ताः | तद् (१.३) | those |
| विधूय | विधूय (वि√धू+ल्यप्) | shaking |
| वैमत्य | वैमत्य | with disagreement |
| धुतेन | धुत (√धू+क्त, ३.१) | shaken |
| मूर्ध्ना | मूर्धन् (३.१) | with her head |
| । | । | . |
| ऊचे | ऊचे (√वच् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| ह्रियः | ह्री (५.१) | for shyness |
| अपि | अपि | even |
| श्लथित | श्लथित (√श्लथ्+क्त) | loosened |
| अनुरोधा | अनुरोध (१.१) | whose regard was |
| पुनः | पुनर् | again |
| धरित्रीपुरुहूतपुत्री | धरित्रीपुरुहूत–पुत्री (१.१) | the princess (daughter of the Indra of the earth) |
| ॥ | ॥ | . |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्र | वः | प्र | वि | ष्टा | इ | व | त | द्गि | र | स्ता |
| वि | धू | य | वै | म | त्य | धु | ते | न | मू | र्ध्ना |
| ऊ | चे | ह्रि | यो | ऽपि | श्ल | थि | ता | नु | रो | धा |
| पु | न | र्ध | रि | त्री | पु | रु | हू | त | पु | त्री |
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