पितुर्नियोगेन निजेच्छया वा
युवानमन्यं यदि वा वृणीषे ।
त्वदर्थमर्थित्वकृतिप्रतीतिः
कीदृङ्मयि स्यान्निषधेश्वरस्य ॥
पितुर्नियोगेन निजेच्छया वा
युवानमन्यं यदि वा वृणीषे ।
त्वदर्थमर्थित्वकृतिप्रतीतिः
कीदृङ्मयि स्यान्निषधेश्वरस्य ॥
युवानमन्यं यदि वा वृणीषे ।
त्वदर्थमर्थित्वकृतिप्रतीतिः
कीदृङ्मयि स्यान्निषधेश्वरस्य ॥
अन्वयः
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यदि पितुः नियोगेन वा निज इच्छया वा अन्यम् युवानम् वृणीषे, (तर्हि) निषध ईश्वरस्य मयि त्वत् अर्थम् अर्थित्व कृति प्रतीतिः कीदृक् स्यात्?
Summary
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"If, by your father's command or by your own choice, you were to select another young man, what kind of confidence would the lord of Nishadha then have in me, regarding my actions as a suitor on your behalf?"
पदच्छेदः
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| पितुः | पितृ (६.१) | of your father |
| नियोगेन | नियोग (३.१) | by the command |
| निज | निज | your own |
| इच्छया | इच्छा (३.१) | by will |
| वा | वा | or |
| युवानम् | युवन् (२.१) | a young man |
| अन्यम् | अन्य (२.१) | another |
| यदि | यदि | If |
| वा | वा | or |
| वृणीषे | वृणीषे (√वृ कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you choose |
| । | । | . |
| त्वदर्थम् | त्वदर्थम् | on your behalf |
| अर्थित्वकृतिप्रतीतिः | अर्थित्व–कृति–प्रतीति (१.१) | the confidence in the act of my petitioning |
| कीदृक् | कीदृश् (१.१) | what kind |
| मयि | अस्मद् (७.१) | in me |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would there be |
| निषधेश्वरस्य | निषध–ईश्वर (६.१) | of the lord of Nishadha |
| ॥ | ॥ | . |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पि | तु | र्नि | यो | गे | न | नि | जे | च्छ | या | वा |
| यु | वा | न | म | न्यं | य | दि | वा | वृ | णी | षे |
| त्व | द | र्थ | म | र्थि | त्व | कृ | ति | प्र | ती | तिः |
| की | दृ | ङ्म | यि | स्या | न्नि | ष | धे | श्व | र | स्य |
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