महीमहेन्द्रः खलु नैषधेन्दुः
तद्वोधनीयः कथमित्थमेव ।
प्रयोजनं सांशयिकं प्रतीदृ-
क्पृथग्जनेनेव स मद्विधेन ॥
महीमहेन्द्रः खलु नैषधेन्दुः
तद्वोधनीयः कथमित्थमेव ।
प्रयोजनं सांशयिकं प्रतीदृ-
क्पृथग्जनेनेव स मद्विधेन ॥
तद्वोधनीयः कथमित्थमेव ।
प्रयोजनं सांशयिकं प्रतीदृ-
क्पृथग्जनेनेव स मद्विधेन ॥
अन्वयः
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नैषध इन्दुः खलु महीमहेन्द्रः (अस्ति) । सः मद्विधेन पृथक् जनेन इव ईदृक् सांशयिकम् प्रयोजनम् प्रति इत्थम् एव कथम् तत् बोधनीयः?
Summary
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"The moon of Nishadha (Nala) is indeed a great king on earth. How can he be informed about such a matter with a doubtful outcome by someone like me, as if by a common person?"
पदच्छेदः
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| महीमहेन्द्रः | मही–महेन्द्र (१.१) | a great king on earth |
| खलु | खलु | indeed |
| नैषध | नैषध | of Nishadha |
| इन्दुः | इन्दु (१.१) | the moon (Nala) |
| तत् | तत् | so |
| बोधनीयः | बोधनीय (√बुध्+णिच्+अनीयर्, १.१) | to be informed |
| कथम् | कथम् | how |
| इत्थम् | इत्थम् | in this way |
| एव | एव | just |
| । | । | . |
| प्रयोजनम् | प्रयोजन (२.१) | purpose |
| सांशयिकम् | सांशयिक (२.१) | which is doubtful |
| प्रति | प्रति | towards |
| ईदृक् | ईदृश् | such |
| पृथक् | पृथक् | an ordinary |
| जनेन | जन (३.१) | by a person |
| इव | इव | like |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मद्विधेन | मद्विध (३.१) | by one like me |
| ॥ | ॥ | . |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ही | म | हे | न्द्रः | ख | लु | नै | ष | धे | न्दुः |
| त | द्वो | ध | नी | यः | क | थ | मि | त्थ | मे | व |
| प्र | यो | ज | नं | सां | श | यि | कं | प्र | ती | दृ |
| क्पृ | थ | ग्ज | ने | ने | व | स | म | द्वि | धे | न |
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