इतीरिता पत्ररथेन तेन
ह्रीणा च हृष्टा च बभाण भैमी ।
चेतो नलङ्कामयते मदीर्यं
नान्यत्र कुत्रापि च साभिलाषम् ॥
इतीरिता पत्ररथेन तेन
ह्रीणा च हृष्टा च बभाण भैमी ।
चेतो नलङ्कामयते मदीर्यं
नान्यत्र कुत्रापि च साभिलाषम् ॥
ह्रीणा च हृष्टा च बभाण भैमी ।
चेतो नलङ्कामयते मदीर्यं
नान्यत्र कुत्रापि च साभिलाषम् ॥
अन्वयः
AI
तेन पत्ररथेन इति ईरिता भैमी ह्रीणा च हृष्टा च (सती) बभाण । मदीयम् चेतः नलम् कामयते, अन्यत्र कुत्रापि च न साभिलाषम् (अस्ति) ।
Summary
AI
Addressed thus by that bird, Damayanti, feeling both shy and delighted, spoke: "My heart desires Nala, and it holds no desire for anything else anywhere."
पदच्छेदः
AI
| इति | इति | Thus |
| ईरिता | ईरित (√ईर्+क्त, १.१) | spoken to |
| पत्ररथेन | पत्ररथ (३.१) | by the bird |
| तेन | तद् (३.१) | by that |
| ह्रीणा | ह्रीण (√ह्री+क्त, १.१) | shy |
| च | च | and |
| हृष्टा | हृष्ट (√हृष्+क्त, १.१) | delighted |
| च | च | and |
| बभाण | बभाण (√भण् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| भैमी | भैमी (१.१) | Damayanti |
| । | । | . |
| चेतः | चेतस् (१.१) | Heart |
| नलम् | नल (२.१) | Nala |
| कामयते | कामयते (√कम् +णिच् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | desires |
| मदीयम् | मदीय (१.१) | my |
| न | न | not |
| अन्यत्र | अन्यत्र | elsewhere |
| कुत्रापि | कुत्रापि | anywhere |
| च | च | and |
| साभिलाषम् | स–अभिलाष (१.१) | is desirous |
| ॥ | ॥ | . |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ती | रि | ता | प | त्र | र | थे | न | ते | न |
| ह्री | णा | च | हृ | ष्टा | च | ब | भा | ण | भै | मी |
| चे | तो | न | ल | ङ्का | म | य | ते | म | दी | र्यं |
| ना | न्य | त्र | कु | त्रा | पि | च | सा | भि | ला | षम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.