मध्ये श्रुतीनां प्रतिवेशिनीनां
सरस्वती वासवती मुखे नः ।
ह्रियेव ताभ्यश्चलतीयमद्धा
पथान्न सत्सङ्गगुणेन नद्धा ॥
मध्ये श्रुतीनां प्रतिवेशिनीनां
सरस्वती वासवती मुखे नः ।
ह्रियेव ताभ्यश्चलतीयमद्धा
पथान्न सत्सङ्गगुणेन नद्धा ॥
सरस्वती वासवती मुखे नः ।
ह्रियेव ताभ्यश्चलतीयमद्धा
पथान्न सत्सङ्गगुणेन नद्धा ॥
अन्वयः
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नः मुखे प्रतिवेशिनीनाम् श्रुतीनाम् मध्ये वासवती सरस्वती अस्ति । इयम् ताभ्यः ह्रिया इव अन्यत्र चलति । अद्धा सत्-सङ्ग-गुणेन नद्धा सती पथात् न चलति ।
Summary
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In my mouth, Sarasvati (speech) dwells between my two neighboring ears. As if out of shame before them (for saying anything false), she moves away. Truly, bound by the virtue of good company, she does not stray from the right path.
पदच्छेदः
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| मध्ये | मध्ये (७.१) | In the middle |
| श्रुतीनाम् | श्रुति (६.३) | of the ears |
| प्रतिवेशिनीनाम् | प्रतिवेशिनी (६.३) | neighboring |
| सरस्वती | सरस्वती (१.१) | Sarasvati (speech) |
| वासवती | वासती (१.१) | dwelling |
| मुखे | मुख (७.१) | in the mouth |
| नः | अस्मद् (६.१) | my |
| ह्रिया | ह्री (३.१) | out of shame |
| इव | इव | as if |
| ताभ्यः | तद् (५.३) | from them |
| चलति | चलति (√चल् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | moves away |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| अद्धा | अद्धा | truly |
| पथात् | पथिन् (५.१) | from the path |
| न | न | not |
| सत् | सत् | good |
| सङ्ग | सङ्ग | company |
| गुणेन | गुण (३.१) | by the thread/virtue of |
| नद्धा | नद्धा (√नह्+क्त, १.१) | bound |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ध्ये | श्रु | ती | नां | प्र | ति | वे | शि | नी | नां |
| स | र | स्व | ती | वा | स | व | ती | मु | खे | नः |
| ह्रि | ये | व | ता | भ्य | श्च | ल | ती | य | म | द्धा |
| प | था | न्न | स | त्स | ङ्ग | गु | णे | न | न | द्धा |
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