वाचं तदीयां परिपीय मृद्वीं
मृद्वीकया तुल्यरसां स हंसः ।
तत्याज तोषं परपुष्टघुष्टे
घृणां च वीणाक्वणिते वितेने ॥
वाचं तदीयां परिपीय मृद्वीं
मृद्वीकया तुल्यरसां स हंसः ।
तत्याज तोषं परपुष्टघुष्टे
घृणां च वीणाक्वणिते वितेने ॥
मृद्वीकया तुल्यरसां स हंसः ।
तत्याज तोषं परपुष्टघुष्टे
घृणां च वीणाक्वणिते वितेने ॥
अन्वयः
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सः हंसः मृद्वीकया तुल्य-रसाम् मृद्वीम् तदीयाम् वाचम् परिपीय परपुष्ट-घुष्टे तोषम् तत्याज, च वीणा-क्वणिते घृणाम् वितेने ।
Summary
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Having drunk her soft speech, which was as sweet as a grape, that swan abandoned his satisfaction in the cuckoo's call and felt disgust for the sound of the veena.
पदच्छेदः
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| वाचम् | वाच् (२.१) | speech |
| तदीयाम् | तदीय (२.१) | her |
| परिपीय | परिपीय (परि√पा+ल्यप्) | Having drunk |
| मृद्वीम् | मृद्वी (२.१) | soft |
| मृद्वीकया | मृद्वीका (३.१) | with a grape |
| तुल्य | तुल्य | equal |
| रसाम् | रसा (२.१) | taste |
| सः | तद् (१.१) | that |
| हंसः | हंस (१.१) | swan |
| तत्याज | तत्याज (√त्यज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | abandoned |
| तोषम् | तोष (२.१) | satisfaction |
| परपुष्ट | परपुष्ट | cuckoo's |
| घुष्टे | घुष्ट (७.१) | in the call of the |
| घृणाम् | घृणा (२.१) | disgust |
| च | च | and |
| वीणा | वीणा | veena |
| क्वणिते | क्वणित (७.१) | for the sound of the |
| वितेने | वितेने (वि√तन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | felt |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वा | चं | त | दी | यां | प | रि | पी | य | मृ | द्वीं |
| मृ | द्वी | क | या | तु | ल्य | र | सां | स | हं | सः |
| त | त्या | ज | तो | षं | प | र | पु | ष्ट | घु | ष्टे |
| घृ | णां | च | वी | णा | क्व | णि | ते | वि | ते | ने |
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