आदर्शतां स्वच्छतया प्रयासि
सतां स तावत्खलु दर्शनीयः ।
आगः पुरस्कुर्वति सागसं मां
यस्यात्मनीदं प्रतिबिम्बितं ते ॥
आदर्शतां स्वच्छतया प्रयासि
सतां स तावत्खलु दर्शनीयः ।
आगः पुरस्कुर्वति सागसं मां
यस्यात्मनीदं प्रतिबिम्बितं ते ॥
सतां स तावत्खलु दर्शनीयः ।
आगः पुरस्कुर्वति सागसं मां
यस्यात्मनीदं प्रतिबिम्बितं ते ॥
अन्वयः
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त्वम् स्वच्छतया सताम् आदर्शताम् प्रयासि । सः तावत् खलु दर्शनीयः । यस्य ते आत्मनि इदम् मम आगः प्रतिबिम्बितम् अस्ति, सः त्वम् सा-अगसम् माम् पुरस्कुर्वति ।
Summary
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Due to your purity, you are like a mirror for the virtuous, and indeed, you are worthy of being seen. This fault of mine is reflected in your self, and by that reflection, you reveal me to be the one at fault.
पदच्छेदः
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| आदर्शताम् | आदर्शता (२.१) | the state of being a mirror |
| स्वच्छतया | स्वच्छता (३.१) | Due to your purity |
| प्रयासि | प्रयासि (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you attain |
| सताम् | सत् (६.३) | for the virtuous |
| सः | तद् (१.१) | He (you) |
| तावत् | तावत् | indeed |
| खलु | खलु | certainly |
| दर्शनीयः | दर्शनीय (√दृश्+अनीयर्, १.१) | worthy of being seen |
| आगः | आगस् (१.१) | fault |
| पुरस्कुर्वति | पुरस्कुर्वति (पुरस्√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reveals |
| स | स | with |
| अगसम् | अगस् (२.१) | fault |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| यस्य | यद् (६.१) | in whose |
| आत्मनि | आत्मन् (७.१) | self |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| प्रतिबिम्बितम् | प्रतिबिम्बित (प्रति√बिम्ब्+क्त, १.१) | is reflected |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | द | र्श | तां | स्व | च्छ | त | या | प्र | या | सि |
| स | तां | स | ता | व | त्ख | लु | द | र्श | नी | यः |
| आ | गः | पु | र | स्कु | र्व | ति | सा | ग | सं | मां |
| य | स्या | त्म | नी | दं | प्र | ति | बि | म्बि | तं | ते |
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