धिक्चापले वत्सिमवत्सलत्वं
यत्प्रेरणादुत्तरलीभवन्त्या ।
समीरसङ्गादिव नीरभङ्ग्या
मया तटस्थस्त्वमुपद्रुतोऽसि ॥
धिक्चापले वत्सिमवत्सलत्वं
यत्प्रेरणादुत्तरलीभवन्त्या ।
समीरसङ्गादिव नीरभङ्ग्या
मया तटस्थस्त्वमुपद्रुतोऽसि ॥
यत्प्रेरणादुत्तरलीभवन्त्या ।
समीरसङ्गादिव नीरभङ्ग्या
मया तटस्थस्त्वमुपद्रुतोऽसि ॥
अन्वयः
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चापले! धिक् । वत्सिम-वत्सलत्वम् धिक् । यत्-प्रेरणात् उत्तरली-भवन्त्या मया, समीर-सङ्गात् नीर-भङ्ग्या इव, तटस्थः त्वम् उपद्रुतः असि ।
Summary
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Shame on my fickleness and fondness for childishness! Instigated by them, I became agitated and have troubled you, who were merely standing by, just as a wave, agitated by contact with the wind, troubles one standing on the bank.
पदच्छेदः
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| धिक् | धिक् | Shame on |
| चापले | चापल (८.१) | O fickleness |
| वत्सिम | वत्सिमन् | childishness |
| वत्सलत्वम् | वत्सलत्व (२.१) | fondness for |
| यत् | यद् | which |
| प्रेरणात् | प्रेरणा (५.१) | by the instigation of |
| उत्तरलीभवन्त्या | उत्तरलीभवन्ती (उत्तरली√भू+शतृ, ३.१) | by me becoming agitated |
| समीर | समीर | wind |
| सङ्गात् | सङ्ग (५.१) | from contact with |
| इव | इव | like |
| नीर | नीर | water |
| भङ्ग्या | भङ्गी (३.१) | by a wave of |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| तटस्थः | तटस्थ (१.१) | one standing by |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| उपद्रुतः | उपद्रुत (उप√द्रु+क्त, १.१) | have been troubled |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धि | क्चा | प | ले | व | त्सि | म | व | त्स | ल | त्वं |
| य | त्प्रे | र | णा | दु | त्त | र | ली | भ | व | न्त्या |
| स | मी | र | स | ङ्गा | दि | व | नी | र | भ | ङ्ग्या |
| म | या | त | ट | स्थ | स्त्व | मु | प | द्रु | तो | ऽसि |
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