किंचित्तिरश्चीनविलोलमौलिः
विचिन्त्य वाच्यं मनसा मुहूर्तम् ।
पतत्रिणं सा पृथिवीन्द्रपुत्री
जगाद वक्त्रेण तृणीकृतेन्दुः ॥
किंचित्तिरश्चीनविलोलमौलिः
विचिन्त्य वाच्यं मनसा मुहूर्तम् ।
पतत्रिणं सा पृथिवीन्द्रपुत्री
जगाद वक्त्रेण तृणीकृतेन्दुः ॥
विचिन्त्य वाच्यं मनसा मुहूर्तम् ।
पतत्रिणं सा पृथिवीन्द्रपुत्री
जगाद वक्त्रेण तृणीकृतेन्दुः ॥
अन्वयः
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किञ्चित्-तिरश्चीन-विलोल-मौलिः तृणी-कृत-इन्दुः सा पृथिवीन्द्र-पुत्री मनसा मुहूर्तम् वाच्यम् विचिन्त्य पतत्रिणम् वक्त्रेण जगाद ।
Summary
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That king's daughter, whose beauty made the moon seem insignificant, with her head slightly turned sideways and trembling, thought for a moment in her mind about what to say, and then spoke to the bird.
पदच्छेदः
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| किंचित् | किंचित् | slightly |
| तिरश्चीन | तिरश्चीन | sideways turned |
| विलोल | विलोल | trembling |
| मौलिः | मौलि (१.१) | whose head was |
| विचिन्त्य | विचिन्त्य (वि√चिन्त्+ल्यप्) | having thought |
| वाच्यम् | वाच्य (√वच्+ण्यत्, २.१) | what was to be said |
| मनसा | मनस् (३.१) | with her mind |
| मुहूर्तम् | मुहूर्तम् | for a moment |
| पतत्रिणम् | पतत्रिन् (२.१) | the bird |
| सा | तद् (१.१) | she |
| पृथिवीन्द्र | पृथिवीन्द्र | king's |
| पुत्री | पुत्री (१.१) | the daughter |
| जगाद | जगाद (√गद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| वक्त्रेण | वक्त्र (३.१) | with her face |
| तृणी | तृण | like straw |
| कृत | कृत (√कृ+क्त) | made |
| इन्दुः | इन्दु (१.१) | the moon |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | चि | त्ति | र | श्ची | न | वि | लो | ल | मौ | लिः |
| वि | चि | न्त्य | वा | च्यं | म | न | सा | मु | हू | र्तम् |
| प | त | त्रि | णं | सा | पृ | थि | वी | न्द्र | पु | त्री |
| ज | गा | द | व | क्त्रे | ण | तृ | णी | कृ | ते | न्दुः |
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