विधिं वधूसृष्टिमपृच्छमेव
तद्यानयुग्यो नलकेलियोग्याम् ।
त्वन्नामवर्णा इव कर्णपीता
मयास्य संक्रीडति चक्रिचक्रे ॥
विधिं वधूसृष्टिमपृच्छमेव
तद्यानयुग्यो नलकेलियोग्याम् ।
त्वन्नामवर्णा इव कर्णपीता
मयास्य संक्रीडति चक्रिचक्रे ॥
तद्यानयुग्यो नलकेलियोग्याम् ।
त्वन्नामवर्णा इव कर्णपीता
मयास्य संक्रीडति चक्रिचक्रे ॥
अन्वयः
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तत्-यान-युग्यः अहम् नल-केलि-योग्याम् वधू-सृष्टिम् विधिम् एव अपृच्छम् । अस्य चक्रि-चक्रे संक्रीडति सति मया त्वत्-नाम-वर्णाः कर्ण-पीताः इव श्रुताः ।
Summary
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I, who am yoked to Brahma's vehicle, asked the Creator himself about his creation of a bride fit for Nala. While his flock of swans was playing, the very letters of your name were heard by me, as if drunk by my ears.
पदच्छेदः
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| विधिम् | विधि (२.१) | Brahma |
| वधू | वधू | bride |
| सृष्टिम् | सृष्टि (२.१) | about the creation of a |
| अपृच्छम् | अपृच्छम् (√प्रछ् कर्तरि लङ् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I asked |
| एव | एव | indeed |
| तत् | तद् | his |
| यान | यान | vehicle |
| युग्यः | युग्य (१.१) | yoked to |
| नल | नल | Nala's |
| केलि | केलि | sport |
| योग्याम् | योग्या (२.१) | fit for |
| त्वत् | युष्मद् | your |
| नाम | नामन् | name |
| वर्णाः | वर्ण (१.३) | the letters of |
| इव | इव | as if |
| कर्ण | कर्ण | by the ears |
| पीताः | पीत (√पा+क्त, १.३) | drunk |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this (Brahma) |
| संक्रीडति | संक्रीडत् (सम्√क्रीड्+शतृ, ७.१) | while playing |
| चक्रि | चक्रिन् | swans |
| चक्रे | चक्र (७.१) | in the flock of |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धिं | व | धू | सृ | ष्टि | म | पृ | च्छ | मे | व |
| त | द्या | न | यु | ग्यो | न | ल | के | लि | यो | ग्याम् |
| त्व | न्ना | म | व | र्णा | इ | व | क | र्ण | पी | ता |
| म | या | स्य | सं | क्री | ड | ति | च | क्रि | च | क्रे |
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