तामिङ्गितैरप्यनुमाय मायाम्
अयं न भैम्या वियदुत्पपात ।
तत्पाणिमात्मोपरिपातुकं तु
मोघं वितेने प्लुतिलाघवेन ॥
तामिङ्गितैरप्यनुमाय मायाम्
अयं न भैम्या वियदुत्पपात ।
तत्पाणिमात्मोपरिपातुकं तु
मोघं वितेने प्लुतिलाघवेन ॥
अयं न भैम्या वियदुत्पपात ।
तत्पाणिमात्मोपरिपातुकं तु
मोघं वितेने प्लुतिलाघवेन ॥
अन्वयः
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अयम् भैम्याः ताम् मायाम् इङ्गितैः अपि अनुमाय वियत् न उत्पपात । तु प्लुति-लाघवेन आत्म-उपरि-पातुकम् तत्-पाणिम् मोघम् वितेने ।
Summary
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This swan, having inferred Damayanti's deceptive plan even from her gestures, did not fly up into the sky. Instead, with the agility of a leap, it rendered futile her hand which was about to fall upon it.
पदच्छेदः
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| ताम् | तद् (२.१) | that |
| इङ्गितैः | इङ्गित (३.३) | by gestures |
| अपि | अपि | even |
| अनुमाय | अनुमाय (अनु√मा+ल्यप्) | having inferred |
| मायाम् | माया (२.१) | deceptive plan |
| अयम् | इदम् (१.१) | this (swan) |
| न | न | not |
| भैम्याः | भैमी (६.१) | of Damayanti |
| वियत् | वियत् (२.१) | into the sky |
| उत्पपात | उत्पपात (उद्√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | flew up |
| तत्पाणिम् | तद्–पाणि (२.१) | her hand |
| आत्मोपरिपातुकं | आत्मन्–उपरि–पातुक (२.१) | which was about to fall upon it |
| तु | तु | but / instead |
| मोघं | मोघ (२.१) | futile |
| वितेने | वितेने (वि√तन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | rendered |
| प्लुतिलाघवेन | प्लुति–लाघव (३.१) | with the agility of a leap |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | मि | ङ्गि | तै | र | प्य | नु | मा | य | मा | या |
| म | यं | न | भै | म्या | वि | य | दु | त्प | पा | त |
| त | त्पा | णि | मा | त्मो | प | रि | पा | तु | कं | तु |
| मो | घं | वि | ते | ने | प्लु | ति | ला | घ | वे | न |
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