रेखाभिरास्ये गणनादिवास्य
द्वात्रिंशता दन्तमयीभिरन्तः ।
चतुर्दशाष्टादश चात्र विद्या
द्वेधापि सन्तीति शशंस वेधाः ॥
रेखाभिरास्ये गणनादिवास्य
द्वात्रिंशता दन्तमयीभिरन्तः ।
चतुर्दशाष्टादश चात्र विद्या
द्वेधापि सन्तीति शशंस वेधाः ॥
द्वात्रिंशता दन्तमयीभिरन्तः ।
चतुर्दशाष्टादश चात्र विद्या
द्वेधापि सन्तीति शशंस वेधाः ॥
अन्वयः
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वेधाः अस्य आस्ये अन्तः द्वात्रिंशता दन्तमयीभिः रेखाभिः गणनात् इव, अत्र चतुर्दश अष्टादश च विद्याः द्वेधा अपि सन्ति इति शशंस ।
Summary
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"It is as if the creator Brahma, by placing thirty-two teeth inside Nala's mouth, has used these lines to count and declare that within him reside both sets of knowledge—the fourteen and the eighteen traditional sciences, totaling thirty-two."
पदच्छेदः
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| रेखाभिः | रेखा (३.३) | with lines |
| आस्ये | आस्य (७.१) | in the face |
| गणनात् | गणना (५.१) | from counting |
| इव | इव | as if |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| द्वात्रिंशता | द्वात्रिंशत् (३.१) | by thirty-two |
| दन्तमयीभिः | दन्तमयी (३.३) | made of teeth |
| अन्तः | अन्तर् | inside |
| चतुर्दश | चतुर्दश (१.३) | fourteen |
| अष्टादश | अष्टादश (१.३) | eighteen |
| च | च | and |
| अत्र | अत्र | here (in him) |
| विद्याः | विद्या (१.३) | branches of knowledge |
| द्वेधा | द्वेधा | of two kinds |
| अपि | अपि | also |
| सन्ति | सन्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are |
| इति | इति | thus |
| शशंस | शशंस (√शंस कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | declared |
| वेधाः | वेधस् (१.१) | Brahma |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रे | खा | भि | रा | स्ये | ग | ण | ना | दि | वा | स्य |
| द्वा | त्रिं | श | ता | द | न्त | म | यी | भि | र | न्तः |
| च | तु | र्द | शा | ष्टा | द | श | चा | त्र | वि | द्या |
| द्वे | धा | पि | स | न्ती | ति | श | शं | स | वे | धाः |
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