अस्मत्किल श्रोत्रसुधां विधाय
रम्भा चिरं भामतुलां नलस्य ।
तत्रानुरक्ता तमनाप्य भेजे
तन्नामगन्धान्नलकूबरं सा ॥
अस्मत्किल श्रोत्रसुधां विधाय
रम्भा चिरं भामतुलां नलस्य ।
तत्रानुरक्ता तमनाप्य भेजे
तन्नामगन्धान्नलकूबरं सा ॥
रम्भा चिरं भामतुलां नलस्य ।
तत्रानुरक्ता तमनाप्य भेजे
तन्नामगन्धान्नलकूबरं सा ॥
अन्वयः
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सा रम्भा नलस्य भामतुलाम् अस्मत् श्रोत्रसुधाम् विधाय चिरम् तत्र अनुरक्ता (सती) तम् अनाप्य तत् नामगन्धम् नलकूबरम् भेजे किल ।
Summary
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The swan says: "Indeed, the celestial nymph Rambha, having heard from us about Nala's beauty which was like nectar to her ears, fell deeply in love with him. Unable to attain Nala, she resorted to Nalakubara, simply because his name bore a faint trace of Nala's."
पदच्छेदः
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| अस्मत् | अस्मद् (५.१) | from us |
| किल | किल | indeed |
| श्रोत्रसुधाम् | श्रोत्र–सुधा (२.१) | nectar for the ears |
| विधाय | विधाय (वि√धा+णिच्+ल्यप्) | having made |
| रम्भा | रम्भा (१.१) | Rambha |
| चिरम् | चिरम् | for a long time |
| भामतुलाम् | भाम–तुला (२.१) | a comparison of beauty |
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| तत्र | तत्र | in him |
| अनुरक्ता | अनुरक्त (अनु√रञ्ज्+क्त, १.१) | attached |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| अनाप्य | अनाप्य (न√आप्+ल्यप्) | not having obtained |
| भेजे | भेजे (√भज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | resorted to |
| तत् | तद् | his |
| नामगन्धम् | नामन्–गन्ध (२.१) | who has a trace of the name |
| नलकूबरम् | नलकूबर (२.१) | Nalakubara |
| सा | तद् (१.१) | she |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्म | त्कि | ल | श्रो | त्र | सु | धां | वि | धा | य |
| र | म्भा | चि | रं | भा | म | तु | लां | न | ल | स्य |
| त | त्रा | नु | र | क्ता | त | म | ना | प्य | भे | जे |
| त | न्ना | म | ग | न्धा | न्न | ल | कू | ब | रं | सा |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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