सुवर्णशैलादवतीर्य तूर्णं
स्वर्वाहिनीवारिकणावकीर्णैः ।
तं वीजयामः स्मरकेलिकाले
पक्षैर्नृपं चामरबद्धसख्यैः ॥
सुवर्णशैलादवतीर्य तूर्णं
स्वर्वाहिनीवारिकणावकीर्णैः ।
तं वीजयामः स्मरकेलिकाले
पक्षैर्नृपं चामरबद्धसख्यैः ॥
स्वर्वाहिनीवारिकणावकीर्णैः ।
तं वीजयामः स्मरकेलिकाले
पक्षैर्नृपं चामरबद्धसख्यैः ॥
अन्वयः
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(वयम्) सुवर्ण-शैलात् तूर्णम् अवतीर्य, स्मर-केलि-काले, स्वर्-वाहिनी-वारि-कण-अवकीर्णैः चामर-बद्ध-सख्यैः पक्षैः तम् नृपम् वीजयामः।
Summary
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"Descending swiftly from the golden mountain (Meru), we fan that king during his amorous sports with our wings, which are sprinkled with droplets from the celestial river and have formed a friendship with royal chowries."
पदच्छेदः
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| सुवर्ण-शैलात् | सुवर्णशैल (५.१) | from the golden mountain (Meru) |
| अवतीर्य | अवतीर्य (अव√तॄ+ल्यप्) | having descended |
| तूर्णम् | तूर्णम् | swiftly |
| स्वर्-वाहिनी-वारि-कण-अवकीर्णैः | स्वर्वाहिनी–वारि–कण–अवकीर्ण (अव√कॄ+क्त, ३.३) | sprinkled with droplets from the celestial river |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| वीजयामः | वीजयामः (√वीजय् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | we fan |
| स्मर-केलि-काले | स्मर–केलि–काल (७.१) | at the time of amorous sports |
| पक्षैः | पक्ष (३.३) | with wings |
| नृपम् | नृप (२.१) | king |
| चामर-बद्ध-सख्यैः | चामर–बद्ध (√बन्ध्+क्त)–सख्य | which have formed a friendship with royal chowries |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | व | र्ण | शै | ला | द | व | ती | र्य | तू | र्णं |
| स्व | र्वा | हि | नी | वा | रि | क | णा | व | की | र्णैः |
| तं | वी | ज | या | मः | स्म | र | के | लि | का | ले |
| प | क्षै | र्नृ | पं | चा | म | र | ब | द्ध | स | ख्यैः |
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