आकस्मिकः पक्षपुटाहतायाः
क्षितेस्तदा यः स्वन उच्चचार ।
द्रागन्यविन्यस्तदृशः स तस्याः
संभ्रान्तमन्तः करणं चकार ॥
आकस्मिकः पक्षपुटाहतायाः
क्षितेस्तदा यः स्वन उच्चचार ।
द्रागन्यविन्यस्तदृशः स तस्याः
संभ्रान्तमन्तः करणं चकार ॥
क्षितेस्तदा यः स्वन उच्चचार ।
द्रागन्यविन्यस्तदृशः स तस्याः
संभ्रान्तमन्तः करणं चकार ॥
अन्वयः
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तदा पक्ष-पुट-आहतायाः क्षितेः यः आकस्मिकः स्वनः उच्चचार, सः द्राक् अन्य-विन्यस्त-दृशः तस्याः अन्तःकरणम् संभ्रान्तम् चकार ।
Summary
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The sudden sound that then arose from the earth being struck by the flapping of its wings quickly flustered the mind of Damayanti, whose gaze had been fixed elsewhere.
पदच्छेदः
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| आकस्मिकः | आकस्मिक (१.१) | sudden |
| पक्षपुटाहतायाः | पक्ष–पुट–आहत (आ√हन्+क्त, ६.१) | of the one struck by the flapping of wings |
| क्षितेः | क्षिति (६.१) | of the earth |
| तदा | तदा | then |
| यः | यद् (१.१) | which |
| स्वनः | स्वन (१.१) | sound |
| उच्चचार | उच्चचार (उद्√चर् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | arose |
| द्राक् | द्राक् | quickly |
| अन्यविन्यस्तदृशः | अन्य–विन्यस्त (वि+नि√अस्+क्त)–दृश् (६.१) | of her whose gaze was fixed elsewhere |
| सः | तद् (१.१) | it |
| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| संभ्रान्तम् | संभ्रान्त (सम्√भ्रम्+क्त, २.१) | flustered |
| अन्तःकरणं | अन्तःकरण (२.१) | mind |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | क | स्मि | कः | प | क्ष | पु | टा | ह | ता | याः |
| क्षि | ते | स्त | दा | यः | स्व | न | उ | च्च | चा | र |
| द्रा | ग | न्य | वि | न्य | स्त | दृ | शः | स | त | स्याः |
| सं | भ्रा | न्त | म | न्तः | क | र | णं | च | का | र |
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