विधेः कदाचिद्भ्रमणीविलासे
श्रमातुरेभ्यः स्वमहत्तरेभ्यः ।
स्कन्धस्य विश्रान्तिमदां तदादि
श्राम्यामि नाविश्रमविश्वगोऽपि ॥
विधेः कदाचिद्भ्रमणीविलासे
श्रमातुरेभ्यः स्वमहत्तरेभ्यः ।
स्कन्धस्य विश्रान्तिमदां तदादि
श्राम्यामि नाविश्रमविश्वगोऽपि ॥
श्रमातुरेभ्यः स्वमहत्तरेभ्यः ।
स्कन्धस्य विश्रान्तिमदां तदादि
श्राम्यामि नाविश्रमविश्वगोऽपि ॥
अन्वयः
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कदाचित् विधेः भ्रमणी-विलासे, स्व-महत्तरेभ्यः श्रम-आरेभ्यः (हंसेभ्यः) स्कन्धस्य विश्रान्तिम् अदाम्। तत्-आदि अविश्रम-विश्व-गः अपि (अहम्) न श्राम्यामि।
Summary
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"Once, during the Creator's pleasure-travels, I offered my shoulder as a resting place to my elders who were weary from fatigue. Since then, even though I roam the universe without rest, I do not get tired."
पदच्छेदः
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| विधेः | विधि (६.१) | of the Creator (Brahma) |
| कदाचित् | कदाचित् | once |
| भ्रमणी-विलासे | भ्रमणी–विलास (७.१) | in the pleasure-travels |
| श्रम-आरेभ्यः | श्रमातुर (४.३) | to the ones afflicted by fatigue |
| स्व-महत्तरेभ्यः | स्वमहत्तर (४.३) | to my elders |
| स्कन्धस्य | स्कन्ध (६.१) | of the shoulder |
| विश्रान्तिम् | विश्रान्ति (२.१) | rest |
| अदाम् | अदाम् (√दा कर्तरि लुङ् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I gave |
| तत्-आदि | तदादि | since then |
| श्राम्यामि | श्राम्यामि (√श्रम् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I get tired |
| न | न | not |
| अविश्रम-विश्व-गः | अविश्रम–विश्वग (१.१) | one who roams the universe without rest |
| अपि | अपि | even |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धेः | क | दा | चि | द्भ्र | म | णी | वि | ला | से |
| श्र | मा | तु | रे | भ्यः | स्व | म | ह | त्त | रे | भ्यः |
| स्क | न्ध | स्य | वि | श्रा | न्ति | म | दां | त | दा | दि |
| श्रा | म्या | मि | ना | वि | श्र | म | वि | श्व | गो | ऽपि |
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