परवति दमयन्ति त्वां न किंचिद्वदामि
द्रुतमुपनम किं मामाह सा शंस हंस ।
इति वदति नलेऽसौ तच्छशंसोपनम्रः
प्रियमनु सुकृतां हि स्वस्पृहाया विलम्बः ॥
परवति दमयन्ति त्वां न किंचिद्वदामि
द्रुतमुपनम किं मामाह सा शंस हंस ।
इति वदति नलेऽसौ तच्छशंसोपनम्रः
प्रियमनु सुकृतां हि स्वस्पृहाया विलम्बः ॥
द्रुतमुपनम किं मामाह सा शंस हंस ।
इति वदति नलेऽसौ तच्छशंसोपनम्रः
प्रियमनु सुकृतां हि स्वस्पृहाया विलम्बः ॥
अन्वयः
AI
'परवति दमयन्ति! त्वाम् न किंचित् वदामि। द्रुतम् उपनम। हंस! सा माम् किम् आह? शंस।' इति नले वदति (सति), असौ उपनम्रः (सन्) तत् शशंस। हि सुकृताम् प्रियम् अनु स्व-स्पृहायाः विलम्बः (न भवति)।
Summary
AI
As Nala spoke, mistaking the swan for Damayanti, "O Damayanti, you are love-stricken! I say nothing. Approach quickly! O Swan, what did she say to me? Tell me!" The swan, bowing, related everything. Indeed, the virtuous do not delay in fulfilling a desire concerning a pleasing matter.
पदच्छेदः
AI
| परवति | परवत् (८.१) | O one in another's power |
| दमयन्ति | दमयन्ती (८.१) | O Damayanti |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | to you |
| न | न | not |
| किंचित् | किंचित् | anything |
| वदामि | वदामि (√वद् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I say |
| द्रुतम् | द्रुतम् | Quickly |
| उपनम | उपनम (उप√नम् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | approach |
| किम् | किम् (२.१) | What |
| माम् | अस्मद् (२.१) | to me |
| आह | आह (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did say |
| सा | तद् (१.१) | she |
| शंस | शंस (√शंस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | Tell |
| हंस | हंस (८.१) | O swan |
| इति | इति | Thus |
| वदति | वदति (√वद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | saying |
| नले | नल (७.१) | Nala |
| असौ | अदस् (१.१) | this one (the swan) |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| शशंस | शशंस (√शंस् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | related |
| उपनम्रः | उपनम्र (१.१) | bowing down |
| प्रियम् | प्रिय (२.१) | a pleasing matter |
| अनु | अनु | regarding |
| सुकृताम् | सुकृत् (६.३) | For the virtuous |
| हि | हि | indeed |
| स्व-स्पृहायाः | स्वस्पृहा (६.१) | of their own desire |
| विलम्बः | विलम्ब (१.१) | delay (is not) |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र | व | ति | द | म | य | न्ति | त्वां | न | किं | चि | द्व | दा | मि |
| द्रु | त | मु | प | न | म | किं | मा | मा | ह | सा | शं | स | हं | स |
| इ | ति | व | द | ति | न | ले | ऽसौ | त | च्छ | शं | सो | प | न | म्रः |
| प्रि | य | म | नु | सु | कृ | तां | हि | स्व | स्पृ | हा | या | वि | ल | म्बः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.