अये कियद्यावदुपैषि दूरं
व्यर्थे परिश्राम्यसि वा किमित्थम् ।
उदेति ते भीरपि किं नु बाले
विलोकयन्त्या न घना वनालीः ॥
अये कियद्यावदुपैषि दूरं
व्यर्थे परिश्राम्यसि वा किमित्थम् ।
उदेति ते भीरपि किं नु बाले
विलोकयन्त्या न घना वनालीः ॥
व्यर्थे परिश्राम्यसि वा किमित्थम् ।
उदेति ते भीरपि किं नु बाले
विलोकयन्त्या न घना वनालीः ॥
अन्वयः
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अये बाले! कियत् दूरम् यावत् उपैषि? इत्थम् व्यर्थे किम् वा परिश्राम्यसि? घनाः वन-आलीः विलोकयन्त्याः ते भीः अपि किम् नु न उदेति?
Summary
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"Oh, young lady! How far will you go? Why do you exert yourself so, in vain? Does no fear arise in you, as you look at these dense rows of forest trees?"
पदच्छेदः
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| अये | अये | Oh! |
| कियत् | कियत् (२.१) | how much |
| यावत् | यावत् | so far |
| उपैषि | उपैषि (उप√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you go |
| दूरम् | दूर (२.१) | far |
| व्यर्थे | व्यर्थ (७.१) | in vain |
| परिश्राम्यसि | परिश्राम्यसि (परि√श्रम् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you toil |
| वा | वा | or |
| किम् | किम् (२.१) | why |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| उदेति | उदेति (उद्√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | arises |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| भीः | भी (१.१) | fear |
| अपि | अपि | also |
| किम् नु | किम् नु | is it that |
| बाले | बाला (८.१) | O young lady! |
| विलोकयन्त्याः | विलोकयन्ती (वि√लोक्+शतृ, ६.१) | of you who are seeing |
| न | न | not |
| घनाः | घन (२.३) | dense |
| वन-आलीः | वनालि (२.३) | rows of forest trees |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ये | कि | य | द्या | व | दु | पै | षि | दू | रं |
| व्य | र्थे | प | रि | श्रा | म्य | सि | वा | कि | मि | त्थम् |
| उ | दे | ति | ते | भी | र | पि | किं | नु | बा | ले |
| वि | लो | क | य | न्त्या | न | घ | ना | व | ना | लीः |
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