त्वद्गुच्छावलिमौक्तिकानि गुलिकास्तं राजहंसं विभो-
र्वेध्यं विद्धि मनोभुवः स्वमपि तां मञ्जुं धनुर्मञ्जरीम् ।
यन्नित्याङ्कनिवासलालिततमज्याभुज्यमानं लस-
न्नाभीमध्यबिला विलासमखिलं रोमालिरालम्बते ॥
त्वद्गुच्छावलिमौक्तिकानि गुलिकास्तं राजहंसं विभो-
र्वेध्यं विद्धि मनोभुवः स्वमपि तां मञ्जुं धनुर्मञ्जरीम् ।
यन्नित्याङ्कनिवासलालिततमज्याभुज्यमानं लस-
न्नाभीमध्यबिला विलासमखिलं रोमालिरालम्बते ॥
र्वेध्यं विद्धि मनोभुवः स्वमपि तां मञ्जुं धनुर्मञ्जरीम् ।
यन्नित्याङ्कनिवासलालिततमज्याभुज्यमानं लस-
न्नाभीमध्यबिला विलासमखिलं रोमालिरालम्बते ॥
अन्वयः
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विभोः मनोभुवः त्वत्-गुच्छ-आवलि-मौक्तिकानि गुलिकाः (सन्ति), तम् राजहंसम् वेध्यम् विद्धि, ताम् (त्वाम्) अपि स्वम् मञ्जुम् धनुः-मञ्जरीम् (विद्धि)। यत् लसत्-नाभी-मध्य-बिला रोमालिः नित्य-अङ्क-निवास-लालित-तम-ज्या-भुज्यमानम् अखिलम् विलासम् आलम्बते।
Summary
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The swan tells Nala: "Know that the pearls from Damayanti's necklace are pellets for Kama, and you, the royal swan, are his target. Know also that she is his beautiful bow-blossom. For, her line of hair, rising from her shining navel, assumes the entire grace of a most cherished bowstring constantly bent on her bosom."
पदच्छेदः
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| त्वद्गुच्छावलिमौक्तिकानि | त्वत्–गुच्छ–आवलि–मौक्तिक (१.३) | The pearls from your clustered necklace |
| गुलिकाः | गुलिका (१.३) | are the pellets |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| राजहंसम् | राजहंस (२.१) | royal swan (you) |
| विभोः | विभु (६.१) | of the lord |
| वेध्यम् | विध्य (२.१) | as the target |
| विद्धि | विद्धि (√विद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | know |
| मनोभुवः | मनोभू (६.१) | of Kama |
| स्वम् | स्व (२.१) | his own |
| अपि | अपि | also |
| ताम् | तद् (२.१) | her (Damayanti) |
| मञ्जुम् | मञ्जु (२.१) | as the beautiful |
| धनुर्मञ्जरीम् | धनुस्–मञ्जरी (२.१) | bow-blossom |
| यत् | यत् | Because |
| नित्य-अङ्क-निवास-लालित-तम-ज्या-भुज्यमानम् | नित्य–अङ्क–निवास–लालिततम–ज्या–भुज्यमान (२.१) | being bent like a most cherished bowstring constantly dwelling on her bosom |
| लसत्-नाभी-मध्य-बिला | लसत्–नाभी–मध्य–बिला (१.१) | originating from the shining navel-cavity |
| विलासम् | विलास (२.१) | grace |
| अखिलम् | अखिल (२.१) | the entire |
| रोमालिः | रोमालि (१.१) | the line of hair |
| आलम्बते | आलम्बते (आ√लम्ब् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | assumes |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्व | द्गु | च्छा | व | लि | मौ | क्ति | का | नि | गु | लि | का | स्तं | रा | ज | हं | सं | वि | भो |
| र्वे | ध्यं | वि | द्धि | म | नो | भु | वः | स्व | म | पि | तां | म | ञ्जुं | ध | नु | र्म | ञ्ज | रीम् |
| य | न्नि | त्या | ङ्क | नि | वा | स | ला | लि | त | त | म | ज्या | भु | ज्य | मा | नं | ल | स |
| न्ना | भी | म | ध्य | बि | ला | वि | ला | स | म | खि | लं | रो | मा | लि | रा | ल | म्ब | ते |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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