बन्धाढ्यनानारतमल्लयुद्ध-
प्रमोदितैः केलिवने मरुद्भिः ।
प्रसूनवृष्टिं पुनरुक्तमुक्तां
प्रतीच्छतं भैमि युवां युवानौ ॥
बन्धाढ्यनानारतमल्लयुद्ध-
प्रमोदितैः केलिवने मरुद्भिः ।
प्रसूनवृष्टिं पुनरुक्तमुक्तां
प्रतीच्छतं भैमि युवां युवानौ ॥
प्रमोदितैः केलिवने मरुद्भिः ।
प्रसूनवृष्टिं पुनरुक्तमुक्तां
प्रतीच्छतं भैमि युवां युवानौ ॥
अन्वयः
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भैमि! केलि-वने बन्ध-आढ्य-नाना-रत-मल्ल-युद्ध-प्रमोदितैः मरुद्भिः पुनः-उक्त-मुक्ताम् प्रसून-वृष्टिम् युवानौ युवाम् प्रतीच्छतम् ।
Summary
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O Bhaimi! In the pleasure garden, may you two young lovers receive the shower of flowers, repeatedly released by the winds, which are delighted by the various wrestling matches of your lovemaking, rich with different embraces.
पदच्छेदः
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| बन्धाढ्यनानारतमल्लयुद्धप्रमोदितैः | बन्ध–आढ्य–नाना–रत–मल्लयुद्ध–प्रमोदित (३.३) | by those delighted by the various wrestling matches of lovemaking, rich with embraces |
| केलिवने | केलिवन (७.१) | in the pleasure garden |
| मरुद्भिः | मरुत् (३.३) | by the winds |
| प्रसूनवृष्टिं | प्रसून–वृष्टि (२.१) | a shower of flowers |
| पुनरुक्तमुक्तां | पुनरुक्त–मुक्त (२.१) | repeatedly released |
| प्रतीच्छतम् | प्रतीच्छतम् (प्रति√इष् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. द्वि.) | may you two receive |
| भैमि | भैमी (८.१) | O Bhaimi |
| युवाम् | युष्मद् (१.२) | you two |
| युवानौ | युवन् (१.२) | young lovers |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब | न्धा | ढ्य | ना | ना | र | त | म | ल्ल | यु | द्ध |
| प्र | मो | दि | तैः | के | लि | व | ने | म | रु | द्भिः |
| प्र | सू | न | वृ | ष्टिं | पु | न | रु | क्त | मु | क्तां |
| प्र | ती | च्छ | तं | भै | मि | यु | वां | यु | वा | नौ |
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