कांसीकृतासीत्खलु मण्डलीन्दोः
संसक्तरश्मिप्रकरा स्मरेण ।
तुला च नाराचलता निजैव
मिथोनुरागस्य समीकृतौ वाम् ॥
कांसीकृतासीत्खलु मण्डलीन्दोः
संसक्तरश्मिप्रकरा स्मरेण ।
तुला च नाराचलता निजैव
मिथोनुरागस्य समीकृतौ वाम् ॥
संसक्तरश्मिप्रकरा स्मरेण ।
तुला च नाराचलता निजैव
मिथोनुरागस्य समीकृतौ वाम् ॥
अन्वयः
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स्मरेण इन्दोः मण्डली संसक्त-रश्मि-प्रकरा सती कांसी-कृता आसीत् खलु । वाम् मिथः-अनुरागस्य समी-कृतौ निजा नाराच-लता एव तुला च कृता आसीत् ।
Summary
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Indeed, Kamadeva has turned the orb of the moon, with its cluster of attached rays, into a weighing scale. And to weigh your mutual love, he has used his own bow-string as the balance beam.
पदच्छेदः
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| कांसीकृता | कांसीकृत (√कांसीकृ+क्त, १.१) | was made into a bronze plate |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| खलु | खलु | indeed |
| मण्डली | मण्डलिन् (१.१) | the orb |
| इन्दोः | इन्दु (६.१) | of the moon |
| संसक्तरश्मिप्रकरा | संसक्त–रश्मि–प्रकर (१.१) | with its cluster of attached rays |
| स्मरेण | स्मर (३.१) | by Kama |
| तुला | तुला (१.१) | a balance |
| च | च | and |
| नाराचलता | नाराच–लता (१.१) | the bow-string |
| निजा | निज (१.१) | his own |
| एव | एव | itself |
| मिथोनुरागस्य | मिथस्–अनुराग (६.१) | of your mutual love |
| समीकृतौ | समीकृति (७.१) | in weighing |
| वाम् | युष्मद् (६.२) | of you two |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कां | सी | कृ | ता | सी | त्ख | लु | म | ण्ड | ली | न्दोः |
| सं | स | क्त | र | श्मि | प्र | क | रा | स्म | रे | ण |
| तु | ला | च | ना | रा | च | ल | ता | नि | जै | व |
| मि | थो | नु | रा | ग | स्य | स | मी | कृ | तौ | वाम् |
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