दिनावसाने तरणेरकस्मा-
न्निमज्जनाद्विश्वविलोचनानि ।
अस्य प्रसादादुडुपस्य नक्तं
तमोविपद्द्वीपवतीं तरन्ति ॥
दिनावसाने तरणेरकस्मा-
न्निमज्जनाद्विश्वविलोचनानि ।
अस्य प्रसादादुडुपस्य नक्तं
तमोविपद्द्वीपवतीं तरन्ति ॥
न्निमज्जनाद्विश्वविलोचनानि ।
अस्य प्रसादादुडुपस्य नक्तं
तमोविपद्द्वीपवतीं तरन्ति ॥
अन्वयः
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दिन-अवसाने तरणेः अकस्मात् निमज्जनात्, विश्व-विलोचनानि नक्तम् अस्य उडुपस्य प्रसादात् तमः-विपत्-द्वीपवतीम् तरन्ति ।
Summary
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At the end of the day, due to the sudden setting of the sun, the eyes of the world, by the grace of this boat (the moon), cross the river of the calamity of darkness at night.
पदच्छेदः
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| दिनावसाने | दिन–अवसान (७.१) | at the end of the day |
| तरणेः | तरणि (५.१) | of the sun |
| अकस्मात् | अकस्मात् | sudden |
| निमज्जनात् | निमज्जन (५.१) | from the setting |
| विश्वविलोचनानि | विश्व–विलोचन (१.३) | the eyes of the world |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| प्रसादात् | प्रसाद (५.१) | by the grace |
| उडुपस्य | उडुप (६.१) | of the boat (moon) |
| नक्तम् | नक्तम् | at night |
| तमोविपद्द्वीपवतीम् | तमस्–विपद्–द्वीपवती (२.१) | the river of the calamity of darkness |
| तरन्ति | तरन्ति (√तॄ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | cross |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | ना | व | सा | ने | त | र | णे | र | क | स्मा |
| न्नि | म | ज्ज | ना | द्वि | श्व | वि | लो | च | ना | नि |
| अ | स्य | प्र | सा | दा | दु | डु | प | स्य | न | क्तं |
| त | मो | वि | प | द्द्वी | प | व | तीं | त | र | न्ति |
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