असावसाम्याद्वितनोः सखा नो
कर्पूरमिन्दुः खलु तस्य मित्रम् ।
दग्धौ हि तौ द्वावपि पूर्वरूपा-
द्यद्वीर्यवत्तामधिकां दधाते ॥
असावसाम्याद्वितनोः सखा नो
कर्पूरमिन्दुः खलु तस्य मित्रम् ।
दग्धौ हि तौ द्वावपि पूर्वरूपा-
द्यद्वीर्यवत्तामधिकां दधाते ॥
कर्पूरमिन्दुः खलु तस्य मित्रम् ।
दग्धौ हि तौ द्वावपि पूर्वरूपा-
द्यद्वीर्यवत्तामधिकां दधाते ॥
अन्वयः
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असौ इन्दुः असाम्यात् वितनोः सखा न। खलु कर्पूरं तस्य मित्रम्। हि यत् तौ द्वौ अपि दग्धौ (सन्तौ) पूर्व-रूपात् अधिकाम् वीर्यवत्तां दधाते।
Summary
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This moon is not a friend of the bodiless Kamadeva due to their dissimilarity. Camphor is truly his friend. This is because both of them (Kamadeva and camphor), after being burnt, acquire a potency even greater than their original form.
पदच्छेदः
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| असौ | अदस् (१.१) | this |
| असाम्यात् | असाम्य (५.१) | due to dissimilarity |
| वितनोः | वितनु (६.१) | of the bodiless one (Kamadeva) |
| सखा | सखि (१.१) | a friend |
| नो | न | not |
| कर्पूरम् | कर्पूर (१.१) | camphor |
| इन्दुः | इन्दु (१.१) | the moon |
| खलु | खलु | truly |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| मित्रम् | मित्र (१.१) | friend |
| दग्धौ | दग्ध (√दह्+क्त, १.२) | having been burnt |
| हि | हि | for |
| तौ | तद् (१.२) | those two |
| द्वावपि | द्वि (१.२)–अपि | both |
| पूर्वरूपात् | पूर्वरूप (५.१) | than their original form |
| यत् | यत् | because |
| वीर्यवत्ताम् | वीर्यवत्ता (२.१) | potency |
| अधिकाम् | अधिक (२.१) | greater |
| दधाते | दधाते (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. द्वि.) | they possess |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सा | व | सा | म्या | द्वि | त | नोः | स | खा | नो |
| क | र्पू | र | मि | न्दुः | ख | लु | त | स्य | मि | त्रम् |
| द | ग्धौ | हि | तौ | द्वा | व | पि | पू | र्व | रू | पा |
| द्य | द्वी | र्य | व | त्ता | म | धि | कां | द | धा | ते |
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