अत्रैव वाणीमधुना तवापि
श्रोतुं समीहे मधुनः सनाभिम् ।
इति प्रियप्रेरितया तयाथ
प्रस्तोतुमारम्भि शशिप्रशस्तिः ॥
अत्रैव वाणीमधुना तवापि
श्रोतुं समीहे मधुनः सनाभिम् ।
इति प्रियप्रेरितया तयाथ
प्रस्तोतुमारम्भि शशिप्रशस्तिः ॥
श्रोतुं समीहे मधुनः सनाभिम् ।
इति प्रियप्रेरितया तयाथ
प्रस्तोतुमारम्भि शशिप्रशस्तिः ॥
अन्वयः
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अधुना अत्र एव मधुनः सनाभिं तव वाणीम् अपि श्रोतुं समीहे। इति प्रिय-प्रेरितया तया अथ शशि-प्रशस्तिः प्रस्तोतुम् आरम्भि।
Summary
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"Now, at this very moment, I desire to hear your speech, which is akin to honey," said Nala. Thus urged by her beloved, she (Damayanti) then began to offer her praise of the moon.
पदच्छेदः
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| अत्र | अत्र | here |
| एव | एव | itself |
| वाणीम् | वाणी (२.१) | speech |
| अधुना | अधुना | now |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अपि | अपि | also |
| श्रोतुम् | श्रोतुम् (√श्रु+तुमुन्) | to hear |
| समीहे | समीहे (सम्√ईह् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I desire |
| मधुनः | मधु (६.१) | of honey |
| सनाभिम् | सनाभि (२.१) | akin to |
| इति | इति | thus |
| प्रिय-प्रेरितया | प्रिय–प्रेरित (प्र√ईर्+णिच्+क्त, ३.१) | urged by her beloved |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| अथ | अथ | then |
| प्रस्तोतुम् | प्रस्तोतुम् (प्र√स्तु+तुमुन्) | to begin praising |
| आरम्भि | आरम्भि (आ+अ√रभ् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.)) | was begun |
| शशि-प्रशस्तिः | शशि–प्रशस्ति (१.१) | the praise of the moon |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | त्रै | व | वा | णी | म | धु | ना | त | वा | पि |
| श्रो | तुं | स | मी | हे | म | धु | नः | स | ना | भिम् |
| इ | ति | प्रि | य | प्रे | रि | त | या | त | या | थ |
| प्र | स्तो | तु | मा | र | म्भि | श | शि | प्र | श | स्तिः |
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