विधिस्तुषारर्तुदिनानि कर्तं-
कर्तं विनिर्माति तदन्तभित्तैः ।
ज्योत्स्नीर्नचेत्तत्प्रतिमा इमा वा
कथं कथं तानि च वामनानि ॥
विधिस्तुषारर्तुदिनानि कर्तं-
कर्तं विनिर्माति तदन्तभित्तैः ।
ज्योत्स्नीर्नचेत्तत्प्रतिमा इमा वा
कथं कथं तानि च वामनानि ॥
कर्तं विनिर्माति तदन्तभित्तैः ।
ज्योत्स्नीर्नचेत्तत्प्रतिमा इमा वा
कथं कथं तानि च वामनानि ॥
अन्वयः
AI
विधिः तत्-अन्त-भित्तैः (रात्रिभिः) तुषार-ऋतु-दिनानि कर्तुम्-कर्तुम् (लघूनि कर्तुं) विनिर्माति। चेत् इमाः ज्योत्स्नीः तत्-प्रतिमाः न (स्युः), तानि (दिनानि) कथं वामनानि (स्युः) वा, (इमाः ज्योत्स्न्यः) च कथं (दीर्घाः स्युः)?
Summary
AI
The Creator constructs the long winter nights by taking substance from the days, thus making them shorter. If these bright, moonlit nights were not the very counterparts of the days, how else could the days be so short and the nights so long?
पदच्छेदः
AI
| विधिः | विधि (१.१) | The Creator |
| तुषार-ऋतु-दिनानि | तुषार–ऋतु–दिन (२.३) | the days of the winter season |
| कर्तुम्-कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्)–कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to shorten and shorten |
| विनिर्माति | विनिर्माति (वि+निर्√मा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | constructs |
| तत्-अन्त-भित्तैः | तद्–अन्त–भित्ति (३.३) | with their end-walls (nights) |
| ज्योत्स्नीः | ज्योत्स्नी (२.३) | moonlit nights |
| न | न | not |
| चेत् | चेत् | if |
| तत्-प्रतिमाः | तद्–प्रतिमा (१.३) | their equivalents |
| इमाः | इदम् (१.३) | these |
| वा | वा | or |
| कथम् | कथम् | how |
| कथम् | कथम् | how |
| तानि | तद् (१.३) | those |
| च | च | and |
| वामनानि | वामन (१.३) | short |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धि | स्तु | षा | र | र्तु | दि | ना | नि | क | र्तं |
| क | र्तं | वि | नि | र्मा | ति | त | द | न्त | भि | त्तैः |
| ज्यो | त्स्नी | र्न | चे | त्त | त्प्र | ति | मा | इ | मा | वा |
| क | थं | क | थं | ता | नि | च | वा | म | ना | नि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.