यत्प्रीतिमद्भिर्वदनैः स्वसाम्या-
दचुम्बि नाकाधिपनायिकानाम् ।
ततस्तदीयाधरयावयोगा-
दुदेति बिम्बारुणबिम्ब एषः ॥
यत्प्रीतिमद्भिर्वदनैः स्वसाम्या-
दचुम्बि नाकाधिपनायिकानाम् ।
ततस्तदीयाधरयावयोगा-
दुदेति बिम्बारुणबिम्ब एषः ॥
दचुम्बि नाकाधिपनायिकानाम् ।
ततस्तदीयाधरयावयोगा-
दुदेति बिम्बारुणबिम्ब एषः ॥
अन्वयः
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यत् यस्मात् स्व-साम्यात् न-अक-अधिप-नायिकानाम् प्रीति-मद्भिः वदनैः एषः चन्द्रः अचुम्बि, ततः तदीय-अधर-याव-योगात् एषः बिम्ब-अरुण-बिम्बः उदेति ।
Summary
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Because it was kissed with affectionate faces by the celestial ladies, due to its resemblance to their own faces, this moon now rises with its disc red like a Bimba fruit, from contact with the red lac-dye on their lips.
पदच्छेदः
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| यत् | यत् | because |
| प्रीतिमद्भिः | प्रीतिमत् (३.३) | with affectionate |
| वदनैः | वदन (३.३) | faces |
| स्वसाम्यात् | स्व–साम्य (५.१) | due to resemblance to their own |
| अचुम्बि | अचुम्बि (√चुम्ब् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was kissed |
| नाकाधिपनायिकानाम् | न–अक–अधिप–नायिका (६.३) | of the celestial ladies |
| ततः | ततः | therefore |
| तदीयाधरयावयोगात् | तदीय–अधर–याव–योग (५.१) | from contact with the red lac-dye on their lips |
| उदेति | उदेति (उद्√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | rises |
| बिम्बारुणबिम्बः | बिम्ब–अरुण–बिम्ब (१.१) | with its disc red like a Bimba fruit |
| एषः | एतद् (१.१) | this (moon) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्प्री | ति | म | द्भि | र्व | द | नैः | स्व | सा | म्या |
| द | चु | म्बि | ना | का | धि | प | ना | यि | का | नाम् |
| त | त | स्त | दी | या | ध | र | या | व | यो | गा |
| दु | दे | ति | बि | म्बा | रु | ण | बि | म्ब | ए | षः |
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