निजानुजेनातिथितामुपेतः
प्राचीपतेर्वाहनवारणेन ।
सिन्दूरसान्द्रे किमकारि मूर्ध्नि
तेनारुणश्रीरयमुज्जिहीते ॥
निजानुजेनातिथितामुपेतः
प्राचीपतेर्वाहनवारणेन ।
सिन्दूरसान्द्रे किमकारि मूर्ध्नि
तेनारुणश्रीरयमुज्जिहीते ॥
प्राचीपतेर्वाहनवारणेन ।
सिन्दूरसान्द्रे किमकारि मूर्ध्नि
तेनारुणश्रीरयमुज्जिहीते ॥
अन्वयः
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प्राची-पतेः वाहन-वारणेन निज-अनुजेन अतिथिताम् उपेतः अयम् इन्दुः तेन सिन्दूर-सान्द्रे मूर्ध्नि किम् अकारि? यतः अयम् अरुण-श्रीः उज्जिहीते ।
Summary
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Having been received as a guest by its younger brother, Airavata, the elephant vehicle of Indra, what was done by him to the moon's head, which was thick with vermilion? For this moon now rises with a reddish glow, implying Airavata applied the color.
पदच्छेदः
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| निजानुजेन | निज–अनुज (३.१) | by its own younger brother |
| अतिथिताम् | अतिथिता (२.१) | the state of being a guest |
| उपेतः | उपेत (उप√इ+क्त, १.१) | having obtained |
| प्राचीपतेः | प्राची–पति (६.१) | of the lord of the East (Indra) |
| वाहनवारणेन | वाहन–वारण (३.१) | by the vehicle-elephant (Airavata) |
| सिन्दूरसान्द्रे | सिन्दूर–सान्द्र (७.१) | thick with vermilion |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| अकारि | अकारि (√कृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was done |
| मूर्ध्नि | मूर्धन् (७.१) | on the head |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| अरुणश्रीः | अरुण–श्री (१.१) | with a reddish glow |
| अयम् | इदम् (१.१) | this (moon) |
| उज्जिहीते | उज्जिहीते (उद्√हा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | rises |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | जा | नु | जे | ना | ति | थि | ता | मु | पे | तः |
| प्रा | ची | प | ते | र्वा | ह | न | वा | र | णे | न |
| सि | न्दू | र | सा | न्द्रे | कि | म | का | रि | मू | र्ध्नि |
| ते | ना | रु | ण | श्री | र | य | मु | ज्जि | ही | ते |
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