पश्यन्वृतोऽप्येष निमेषमद्रे-
रधित्यकाभूमितिरस्करिण्या ।
प्रवर्षति प्रेयसि चन्द्रिकामि-
श्चकोरचञ्चूचुलुकप्रमिन्दुः ॥
पश्यन्वृतोऽप्येष निमेषमद्रे-
रधित्यकाभूमितिरस्करिण्या ।
प्रवर्षति प्रेयसि चन्द्रिकामि-
श्चकोरचञ्चूचुलुकप्रमिन्दुः ॥
रधित्यकाभूमितिरस्करिण्या ।
प्रवर्षति प्रेयसि चन्द्रिकामि-
श्चकोरचञ्चूचुलुकप्रमिन्दुः ॥
अन्वयः
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प्रेयसि, पश्य । एषः इन्दुः अद्रेः अधित्यका-भूमि-तिरस्करिण्या निमेषम् वृतः अपि, चकोर-चञ्चू-चुलुक-प्रम् चन्द्रिकामिः प्रवर्षति ।
Summary
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O beloved, look! This moon, though hidden for a moment by the curtain of the mountain's plateau, is showering moonlight in quantities that can be held in the cupped beaks of the Chakora birds.
पदच्छेदः
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| पश्यन् | पश्यत् (√दृश्+शतृ, १.१) | (you) seeing/look |
| वृतः | वृत (√वृ+क्त, १.१) | covered |
| अपि | अपि | even though |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| निमेषम् | निमेष (२.१) | for a moment |
| अद्रेः | अद्रि (६.१) | of the mountain |
| अधित्यकाभूमितिरस्करिण्या | अधित्यका–भूमि–तिरस्करिणी (३.१) | by the curtain of the plateau-land |
| प्रवर्षति | प्रवर्षति (प्र√वृष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | showers |
| प्रेयसि | प्रेयसी (८.१) | O beloved |
| चन्द्रिकामिः | चन्द्रिका (३.३) | moonlight |
| चकोरचञ्चूचुलुकप्रम् | चकोर–चञ्चू–चुलुक–प्र | in quantities that can be held in the cupped beaks of Chakora birds |
| इन्दुः | इन्दु (१.१) | the moon |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | श्य | न्वृ | तो | ऽप्ये | ष | नि | मे | ष | म | द्रे |
| र | धि | त्य | का | भू | मि | ति | र | स्क | रि | ण्या |
| प्र | व | र्ष | ति | प्रे | य | सि | च | न्द्रि | का | मि |
| श्च | को | र | च | ञ्चू | चु | लु | क | प्र | मि | न्दुः |
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