उच्चैस्तरादम्बरशैलमौले-
श्च्युतो रविर्गैरिकगण्डशैलः ।
तस्यैव पातेन विचूर्णितस्य
संध्यारजोराजिरिहोज्जिहीते ॥
उच्चैस्तरादम्बरशैलमौले-
श्च्युतो रविर्गैरिकगण्डशैलः ।
तस्यैव पातेन विचूर्णितस्य
संध्यारजोराजिरिहोज्जिहीते ॥
श्च्युतो रविर्गैरिकगण्डशैलः ।
तस्यैव पातेन विचूर्णितस्य
संध्यारजोराजिरिहोज्जिहीते ॥
अन्वयः
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अम्बरशैलमौलेः उच्चैस्तरात् च्युतः रविः गैरिकगण्डशैलः (इव अस्ति) । इह विचूर्णितस्य तस्य एव पातेन संध्यारजोराजिः उज्जहीते ।
Summary
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The sun, fallen from the very high peak of the sky-mountain, is like a boulder of red chalk. Here, the row of evening dust (the twilight glow) rises from the fall of that very sun, as if it were pulverized.
पदच्छेदः
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| उच्चैस्तरात् | उच्चैस्तर (५.१) | from the very high |
| अम्बरशैलमौलेः | अम्बर–शैल–मौलि (५.१) | peak of the sky-mountain |
| च्युतः | च्युत (√च्यु+क्त, १.१) | fallen |
| रविः | रवि (१.१) | the sun |
| गैरिकगण्डशैलः | गैरिक–गण्डशैल (१.१) | is like a boulder of red chalk |
| तस्य | तद् (६.१) | its |
| एव | एव | very |
| पातेन | पात (३.१) | by the fall |
| विचूर्णितस्य | विचूर्णित (वि√चूर्ण्+क्त, ६.१) | of it, being pulverized |
| संध्यारजोराजिः | संध्या–रजस्–राजि (१.१) | the row of evening dust (twilight) |
| इह | इह | here |
| उज्जहीते | उज्जहीते (उद्√हा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | rises |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | च्चै | स्त | रा | द | म्ब | र | शै | ल | मौ | ले |
| श्च्यु | तो | र | वि | र्गै | रि | क | ग | ण्ड | शै | लः |
| त | स्यै | व | पा | ते | न | वि | चू | र्णि | त | स्य |
| सं | ध्या | र | जो | रा | जि | रि | हो | ज्जि | ही | ते |
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