विलोकनेनानुगृहाण ताव-
द्दिशं जलानामधिपस्य दारान् ।
अक्षालि लाक्षापयसेव येय-
मपूरि पङ्कैरिव कुङ्कुमस्य ॥
विलोकनेनानुगृहाण ताव-
द्दिशं जलानामधिपस्य दारान् ।
अक्षालि लाक्षापयसेव येय-
मपूरि पङ्कैरिव कुङ्कुमस्य ॥
द्दिशं जलानामधिपस्य दारान् ।
अक्षालि लाक्षापयसेव येय-
मपूरि पङ्कैरिव कुङ्कुमस्य ॥
अन्वयः
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तावत् जलानाम् अधिपस्य दारान् दिशम् विलोकनेन अनुगृहाण । या इयम् लाक्षापयसा इव अक्षालि, कुङ्कुमस्य पङ्कैः इव अपूरि ।
Summary
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'First, favor with your glance the direction which is the wife of the lord of the waters (the West). This direction seems to have been washed with lac-juice and filled with the paste of saffron.'
पदच्छेदः
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| विलोकनेन | विलोकन (३.१) | with a glance |
| अनुगृहाण | अनुगृहाण (अनु√ग्रह् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | favor |
| तावत् | तावत् | first |
| दिशम् | दिश् (२.१) | the direction |
| जलानाम् | जल (६.३) | of the waters |
| अधिपस्य | अधिप (६.१) | of the lord |
| दारान् | दाराः (२.३) | the wife (the West) |
| अक्षालि | अक्षालि (√क्षल् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was washed |
| लाक्षापयसा | लाक्षा–पयस् (३.१) | with lac-juice |
| इव | इव | as if |
| या | यद् (१.१) | which |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| अपूरि | अपूरि (√पृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was filled |
| पङ्कैः | पङ्क (३.३) | with paste |
| इव | इव | as if |
| कुङ्कुमस्य | कुङ्कुम (६.१) | of saffron |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | लो | क | ने | ना | नु | गृ | हा | ण | ता | व |
| द्दि | शं | ज | ला | ना | म | धि | प | स्य | दा | रान् |
| अ | क्षा | लि | ला | क्षा | प | य | से | व | ये | य |
| म | पू | रि | प | ङ्कै | रि | व | कु | ङ्कु | म | स्य |
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