दिने मम द्वेषिणि कीदृगेषां
प्रचार इत्याकलनाय चारीः ।
छाया विधाय प्रतिवस्तुलग्नाः
प्रावेशयत्प्रष्टुमिवान्धकारः ॥
दिने मम द्वेषिणि कीदृगेषां
प्रचार इत्याकलनाय चारीः ।
छाया विधाय प्रतिवस्तुलग्नाः
प्रावेशयत्प्रष्टुमिवान्धकारः ॥
प्रचार इत्याकलनाय चारीः ।
छाया विधाय प्रतिवस्तुलग्नाः
प्रावेशयत्प्रष्टुमिवान्धकारः ॥
अन्वयः
AI
अन्धकारः, 'मम द्वेषिणि दिने एषाम् वस्तूनाम् प्रचारः कीदृक्?' इति आकलनाय, प्रति-वस्तु-लग्नाः छायाः चारीः विधाय प्रष्टुम् इव प्रावेशयत् ।
Summary
AI
It was as if the Darkness, to ascertain 'What is the conduct of things during the day, my enemy?', sent in shadows attached to every object as spies to inquire and report back.
पदच्छेदः
AI
| दिने | दिन (७.१) | during the day |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| द्वेषिणि | द्वेषिन् (७.१) | enemy |
| कीदृक् | कीदृश् (१.१) | of what sort |
| एषाम् | इदम् (६.३) | of these |
| प्रचारः | प्रचार (१.१) | is the conduct |
| इति | इति | thus |
| आकलनाय | आकलन (४.१) | to ascertain |
| चारीः | चारी (२.३) | spies |
| छायाः | छाया (२.३) | shadows |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| प्रतिवस्तुलग्नाः | प्रति–वस्तु–लग्न (२.३) | attached to every object |
| प्रावेशयत् | प्रावेशयत् (प्र√विश् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sent in |
| प्रष्टुम् | प्रष्टुम् (√प्रछ्+तुमुन्) | to ask |
| इव | इव | as if |
| अन्धकारः | अन्धकार (१.१) | the Darkness |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | ने | म | म | द्वे | षि | णि | की | दृ | गे | षां |
| प्र | चा | र | इ | त्या | क | ल | ना | य | चा | रीः |
| छा | या | वि | धा | य | प्र | ति | व | स्तु | ल | ग्नाः |
| प्रा | वे | श | य | त्प्र | ष्टु | मि | वा | न्ध | का | रः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.