विवस्वतानायिषतेव मिश्राः
स्वगोसहस्रेण समं जनानाम् ।
गावोऽपि नेत्रापरनामधेया-
स्तेनेदमान्ध्यं खलु नान्धकारैः ॥
विवस्वतानायिषतेव मिश्राः
स्वगोसहस्रेण समं जनानाम् ।
गावोऽपि नेत्रापरनामधेया-
स्तेनेदमान्ध्यं खलु नान्धकारैः ॥
स्वगोसहस्रेण समं जनानाम् ।
गावोऽपि नेत्रापरनामधेया-
स्तेनेदमान्ध्यं खलु नान्धकारैः ॥
अन्वयः
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विवस्वता स्व-गो-सहस्रेण समम् मिश्राः जनानाम् नेत्र-अपर-नामधेयाः गावः अपि अनायिषत इव । तेन इदम् आन्ध्यम् अस्ति, खलु अन्धकारैः न ।
Summary
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It seems as if the Sun, along with his own thousand rays ('go'), has also taken away the 'rays' ('go') of people, which are also known as eyes. Therefore, this is blindness, not something caused by darkness.
पदच्छेदः
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| विवस्वता | विवस्वत् (३.१) | by the Sun |
| अनायिषत | अनायिषत (आ√नी +णिच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | were taken away |
| इव | इव | as if |
| मिश्राः | मिश्र (१.३) | mixed |
| स्वगोसहस्रेण | स्व–गो–सहस्र (३.१) | with his own thousand rays |
| समम् | समम् | along with |
| जनानाम् | जन (६.३) | of people |
| गावः | गो (१.३) | rays/eyes |
| अपि | अपि | also |
| नेत्रापरनामधेयाः | नेत्र–अपर–नामधेय (१.३) | which have another name 'eyes' |
| तेन | तद् (३.१) | therefore |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| आन्ध्यम् | आन्ध्य (१.१) | is blindness |
| खलु | खलु | indeed |
| न | न | not |
| अन्धकारैः | अन्धकार (३.३) | by darknesses |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | व | स्व | ता | ना | यि | ष | ते | व | मि | श्राः |
| स्व | गो | स | ह | स्रे | ण | स | मं | ज | ना | नाम् |
| गा | वो | ऽपि | ने | त्रा | प | र | ना | म | धे | या |
| स्ते | ने | द | मा | न्ध्यं | ख | लु | ना | न्ध | का | रैः |
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