ऊर्ध्वार्पितन्युब्जकटाहकल्पे
यद्व्योम्नि दीपेन दिनाधिपेन ।
न्यधायि तद्भूममिलद्गुरुत्वं
भूमौ तमः कज्जलमस्खलत्किम् ॥
ऊर्ध्वार्पितन्युब्जकटाहकल्पे
यद्व्योम्नि दीपेन दिनाधिपेन ।
न्यधायि तद्भूममिलद्गुरुत्वं
भूमौ तमः कज्जलमस्खलत्किम् ॥
यद्व्योम्नि दीपेन दिनाधिपेन ।
न्यधायि तद्भूममिलद्गुरुत्वं
भूमौ तमः कज्जलमस्खलत्किम् ॥
अन्वयः
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ऊर्ध्व-अर्पित-न्युब्ज-कटाह-कल्पे व्योम्नि दिन-अधिपेन दीपेन यत् कज्जलम् न्यधायि, भूम-मिलत्-गुरुत्वम् तत् तमः-कज्जलम् भूमौ अस्खलत् किम्?
Summary
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In the sky, imagined as an inverted cauldron placed overhead, the sun acted as a lamp. Has the soot (darkness) produced by this sun-lamp, having gained weight by mixing with earthly elements, now fallen to the ground?
पदच्छेदः
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| ऊर्ध्वार्पितन्युब्जकटाहकल्पे | ऊर्ध्व–अर्पित–न्युब्ज–कटाह–कल्प (७.१) | in the sky which is like an inverted cauldron placed overhead |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| व्योम्नि | व्योमन् (७.१) | in the sky |
| दीपेन | दीप (३.१) | by the lamp |
| दिनाधिपेन | दिन–अधिप (३.१) | by the lord of the day (sun) |
| न्यधायि | न्यधायि (नि√धा +णिच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was produced |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| भूममिलद्गुरुत्वम् | भूम–मिलत्–गुरुत्व (१.१) | which has gained weight by mixing with earthly elements |
| भूमौ | भूमि (७.१) | on the earth |
| तमः | तमस् (१.१) | darkness |
| कज्जलम् | कज्जल (१.१) | soot |
| अस्खलत् | अस्खलत् (√स्खल् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | fell |
| किम् | किम् | ? |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऊ | र्ध्वा | र्पि | त | न्यु | ब्ज | क | टा | ह | क | ल्पे |
| य | द्व्यो | म्नि | दी | पे | न | दि | ना | धि | पे | न |
| न्य | धा | यि | त | द्भू | म | मि | ल | द्गु | रु | त्वं |
| भू | मौ | त | मः | क | ज्ज | ल | म | स्ख | ल | त्किम् |
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