रामालिरोमावलिदिग्विगाहि
ध्वान्तायते वाहनमन्तकस्य ।
यद्वीक्ष्य दूरादिव बिभ्यतः स्वा-
नश्वान्गृहीत्वापसृतो विवस्वान् ॥
रामालिरोमावलिदिग्विगाहि
ध्वान्तायते वाहनमन्तकस्य ।
यद्वीक्ष्य दूरादिव बिभ्यतः स्वा-
नश्वान्गृहीत्वापसृतो विवस्वान् ॥
ध्वान्तायते वाहनमन्तकस्य ।
यद्वीक्ष्य दूरादिव बिभ्यतः स्वा-
नश्वान्गृहीत्वापसृतो विवस्वान् ॥
अन्वयः
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अन्तकस्य राम-आलि-रोमावलि-दिक्-विगाहि वाहनम् ध्वान्तायते। यत् दूरात् वीक्ष्य इव बिभ्यतः विवस्वान् स्वान् अश्वान् गृहीत्वा अपसृतः।
Summary
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The darkness, pervading the directions like a line of hair on a beautiful woman, acts like the vehicle of Yama (the buffalo). It is as if the sun, fearing it, has retreated from afar, taking his own horses with him.
पदच्छेदः
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| राम | राम | beautiful woman |
| आलि | आलि | line |
| रोमावलि | रोमावलि | line of hair |
| दिक् | दिश् | directions |
| विगाहि | विगाहिन् (१.१) | pervading |
| ध्वान्तायते | ध्वान्तायते (√ध्वान्त +क्यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | acts like darkness |
| वाहनम् | वाहन (१.१) | the vehicle |
| अन्तकस्य | अन्तक (६.१) | of Yama |
| यत् | यद् (२.१) | which |
| वीक्ष्य | वीक्ष्य (वि√ईक्ष्+ल्यप्) | having seen |
| दूरात् | दूर (५.१) | from afar |
| इव | इव | as if |
| बिभ्यतः | बिभ्यत् (√भी+शतृ, १.१) | fearing |
| स्वान् | स्व (२.३) | his own |
| अश्वान् | अश्व (२.३) | horses |
| गृहीत्वा | गृहीत्वा (√ग्रह्+क्त्वा) | having taken |
| अपसृतः | अपसृत (अप√सृ+क्त, १.१) | has retreated |
| विवस्वान् | विवस्वत् (१.१) | the sun |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | मा | लि | रो | मा | व | लि | दि | ग्वि | गा | हि |
| ध्वा | न्ता | य | ते | वा | ह | न | म | न्त | क | स्य |
| य | द्वी | क्ष्य | दू | रा | दि | व | बि | भ्य | तः | स्वा |
| न | श्वा | न्गृ | ही | त्वा | प | सृ | तो | वि | व | स्वान् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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