शचीसपत्न्यां दिशि पश्य भैमी
शक्रेभदानद्रवनिर्झरस्य ।
पोप्लूयते वासरसेतुनाशा-
दुच्छृङ्खलः पूर इवान्धकारः ॥
शचीसपत्न्यां दिशि पश्य भैमी
शक्रेभदानद्रवनिर्झरस्य ।
पोप्लूयते वासरसेतुनाशा-
दुच्छृङ्खलः पूर इवान्धकारः ॥
शक्रेभदानद्रवनिर्झरस्य ।
पोप्लूयते वासरसेतुनाशा-
दुच्छृङ्खलः पूर इवान्धकारः ॥
अन्वयः
AI
भैमी, पश्य, शची-सपत्न्याम् दिशि वासर-सेतु-नाशात् उच्छृङ्खलः अन्धकारः शक्र-इभ-दान-द्रव-निर्झरस्य पूरः इव पोप्लूयते।
Summary
AI
O Bhaimi, look! In the eastern direction, the co-wife of Shachi, the unrestrained darkness, freed by the destruction of the day-dam, is rapidly spreading like a flood of ichor from Indra's elephant, Airavata.
पदच्छेदः
AI
| शची | शची | of Shachi |
| सपत्न्याम् | सपत्नी (७.१) | in the co-wife (East) |
| दिशि | दिश् (७.१) | in the direction |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | look |
| भैमी | भैमी (८.१) | O Bhaimi |
| शक्र | शक्र | of Indra |
| इभ | इभ | elephant |
| दान | दान | ichor |
| द्रव | द्रव | fluid |
| निर्झरस्य | निर्झर (६.१) | of the stream |
| पोप्लूयते | पोप्लूयते (√प्लु +यङ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is rapidly spreading |
| वासर | वासर | day |
| सेतु | सेतु | dam |
| नाशात् | नाश (५.१) | from the destruction of |
| उच्छृङ्खलः | उच्छृङ्खल (१.१) | unrestrained |
| पूरः | पूर (१.१) | flood |
| इव | इव | like |
| अन्धकारः | अन्धकार (१.१) | the darkness |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | ची | स | प | त्न्यां | दि | शि | प | श्य | भै | मी |
| श | क्रे | भ | दा | न | द्र | व | नि | र्झ | र | स्य |
| पो | प्लू | य | ते | वा | स | र | से | तु | ना | शा |
| दु | च्छृ | ङ्ख | लः | पू | र | इ | वा | न्ध | का | रः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.