लोकाश्रयो मण्डपमादिसृष्टि-
ब्रह्माण्डमाभात्यनुकाष्ठमस्य ।
स्वकान्तिरेणूत्करवान्तिमन्ति
घुणव्रणद्वारनिभानि भानि ॥
लोकाश्रयो मण्डपमादिसृष्टि-
ब्रह्माण्डमाभात्यनुकाष्ठमस्य ।
स्वकान्तिरेणूत्करवान्तिमन्ति
घुणव्रणद्वारनिभानि भानि ॥
ब्रह्माण्डमाभात्यनुकाष्ठमस्य ।
स्वकान्तिरेणूत्करवान्तिमन्ति
घुणव्रणद्वारनिभानि भानि ॥
अन्वयः
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आदि-सृष्टि-ब्रह्माण्डम् लोक-आश्रयः मण्डपम् आभाति। अस्य अनु-काष्ठम् स्व-कान्ति-रेणु-उत्कर-वन्ति घुण-व्रण-द्वार-निभानि भानि भान्ति।
Summary
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The universe-egg of the original creation, the support of all worlds, shines like a pavilion. In every direction of it, the stars, resembling holes made by woodworms, shine, possessing heaps of dust which are their own light.
पदच्छेदः
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| लोक | लोक | of the worlds |
| आश्रयः | आश्रय (१.१) | the support |
| मण्डपम् | मण्डप (१.१) | pavilion |
| आदि | आदि | original |
| सृष्टि | सृष्टि | creation |
| ब्रह्माण्डम् | ब्रह्माण्ड (१.१) | the universe-egg |
| आभाति | आभाति (आ√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shines |
| अनु | अनु | in every |
| काष्ठम् | काष्ठा (२.१) | direction |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| स्व | स्व | their own |
| कान्ति | कान्ति | light |
| रेणु | रेणु | dust |
| उत्कर | उत्कर | heaps |
| वन्ति | वत् (१.३) | possessing |
| भान्ति | भान्ति (√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | shine |
| घुण | घुण | woodworm |
| व्रण | व्रण | hole |
| द्वार | द्वार | opening |
| निभानि | निभ (१.३) | resembling |
| भानि | भ (१.३) | the stars |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लो | का | श्र | यो | म | ण्ड | प | मा | दि | सृ | ष्टि |
| ब्र | ह्मा | ण्ड | मा | भा | त्य | नु | का | ष्ठ | म | स्य |
| स्व | का | न्ति | रे | णू | त्क | र | वा | न्ति | म | न्ति |
| घु | ण | व्र | ण | द्वा | र | नि | भा | नि | भा | नि |
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