किं योगिनीयं रजनी रतीशं
याजीजिवत्पद्मममूमुहच्च ।
योगर्द्धिमस्या महतीमलग्न-
मिदं वदत्यम्बरचुम्बि कम्बु ॥
किं योगिनीयं रजनी रतीशं
याजीजिवत्पद्मममूमुहच्च ।
योगर्द्धिमस्या महतीमलग्न-
मिदं वदत्यम्बरचुम्बि कम्बु ॥
याजीजिवत्पद्मममूमुहच्च ।
योगर्द्धिमस्या महतीमलग्न-
मिदं वदत्यम्बरचुम्बि कम्बु ॥
अन्वयः
AI
किम् इयम् रजनी योगिनी, या रति-ईशम् अజీजिवत्, पद्मम् च अमूमुहत्? इदम् अम्बर-चुम्बि अलग्नम् कम्बु अस्याः महतीम् योग-ऋद्धिम् वदति।
Summary
AI
Is this night a Yogini, who revived Kamadeva and made the lotuses close? This sky-kissing, unattached conch (the moon) speaks of her great yogic power.
पदच्छेदः
AI
| किम् | किम् | Is? |
| योगिनी | योगिनी (१.१) | a Yogini |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| रजनी | रजनी (१.१) | night |
| रति | रति | of Rati |
| ईशम् | ईश (२.१) | the lord (Kamadeva) |
| या | यद् (१.१) | who |
| अజీजिवत् | अజీजिवत् (√जीव् +णिच् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | revived |
| पद्मम् | पद्म (२.१) | the lotus |
| अमूमुहत् | अमूमुहत् (√मुह् +णिच् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | caused to close |
| च | च | and |
| योग | योग | yogic |
| ऋद्धिम् | ऋद्धि (२.१) | power |
| अस्याः | इदम् (६.१) | her |
| महतीम् | महत् (२.१) | great |
| अलग्नम् | लग्न (१.१) | unattached |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| वदति | वदति (√वद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | tells |
| अम्बर | अम्बर | sky |
| चुम्बि | चुम्बिन् (१.१) | kissing |
| कम्बु | कम्बु (१.१) | conch (moon) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | यो | गि | नी | यं | र | ज | नी | र | ती | शं |
| या | जी | जि | व | त्प | द्म | म | मू | मु | ह | च्च |
| यो | ग | र्द्धि | म | स्या | म | ह | ती | म | ल | ग्न |
| मि | दं | व | द | त्य | म्ब | र | चु | म्बि | क | म्बु |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.