अंशं षोडषमामनन्ति रजनीभर्तुः कलां वृत्तय-
त्न्येनं पञ्चदशैव ताः प्रतिपदाद्याराकवर्धिष्णवः ।
या शेषा पुनरुद्धृता तिथिमृते सा किं हरालंकृति-
स्तस्याः स्थानबिलं कलङ्कमिह किं पश्यामि सश्यामिकम् ॥
अंशं षोडषमामनन्ति रजनीभर्तुः कलां वृत्तय-
त्न्येनं पञ्चदशैव ताः प्रतिपदाद्याराकवर्धिष्णवः ।
या शेषा पुनरुद्धृता तिथिमृते सा किं हरालंकृति-
स्तस्याः स्थानबिलं कलङ्कमिह किं पश्यामि सश्यामिकम् ॥
त्न्येनं पञ्चदशैव ताः प्रतिपदाद्याराकवर्धिष्णवः ।
या शेषा पुनरुद्धृता तिथिमृते सा किं हरालंकृति-
स्तस्याः स्थानबिलं कलङ्कमिह किं पश्यामि सश्यामिकम् ॥
अन्वयः
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वृत्तयः रजनी-भर्तुः षोडशम् अंशम् कलाम् आमनन्ति । ताः प्रतिपत्-आद्याः पञ्चदश एव (कलाः) एनम् आ-राका-वर्धिष्णवः (भवन्ति) । या शेषा पुनः तिथिम् ऋते उद्धृता, सा किम् हर-अलंकृतिः (अस्ति)? इह तस्याः स्थान-बिलम् स-श्यामिकम् कलङ्कम् किम् (अस्ति इति) पश्यामि ।
Summary
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They say the sixteenth part of the moon is its phase (kalā). But only fifteen phases, starting from Pratipad, wax and wane. Is the remaining one, which is extracted beyond the lunar days, the one that adorns Shiva? And do I see here its darkish empty socket as the spot on the moon?
पदच्छेदः
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| अंशं | अंश (२.१) | part |
| षोडशम् | षोडश (२.१) | sixteenth |
| आमनन्ति | आमनन्ति (आ√मन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they consider |
| रजनीभर्तुः | रजनीभर्तृ (६.१) | of the lord of the night |
| कलां | कला (२.१) | a digit/phase |
| वृत्तयः | वृत्ति (१.३) | the functions/phases |
| एनं | इदम् (२.१) | this |
| पञ्चदशैव | पञ्चदश–एव | only fifteen |
| ताः | तद् (१.३) | those |
| प्रतिपदाद्याः | प्रतिपदादि (१.३) | beginning with Pratipad |
| आराकवर्धिष्णवः | आराकावर्धिष्णु (१.३) | waxing and waning |
| या | यद् (१.१) | which |
| शेषा | शेषा (१.१) | remaining |
| पुनः | पुनर् | again |
| उद्धृता | उद्धृत (उद्√हृ+क्त, १.१) | taken out |
| तिथिमृते | तिथिम्–ऋते | without a lunar day |
| सा | तद् (१.१) | that |
| किं | किम् | is it? |
| हरालंकृतिः | हरालंकृति (१.१) | Shiva's ornament |
| तस्याः | तद् (६.१) | its |
| स्थानबिलं | स्थानबिल (१.१) | the hole of its place |
| कलङ्कम् | कलङ्क (१.१) | the spot |
| इह | इह | here |
| किं | किम् | is it? |
| पश्यामि | पश्यामि (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I see |
| सश्यामिकम् | सश्यामिक (१.१) | darkish |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अं | शं | षो | ड | ष | मा | म | न | न्ति | र | ज | नी | भ | र्तुः | क | लां | वृ | त्त | य |
| त्न्ये | नं | प | ञ्च | द | शै | व | ताः | प्र | ति | प | दा | द्या | रा | क | व | र्धि | ष्ण | वः |
| या | शे | षा | पु | न | रु | द्धृ | ता | ति | थि | मृ | ते | सा | किं | ह | रा | लं | कृ | ति |
| स्त | स्याः | स्था | न | बि | लं | क | ल | ङ्क | मि | ह | किं | प | श्या | मि | स | श्या | मि | कम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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