पचेलिमं दाडिममर्कबिम्ब-
मुत्तार्य संध्या त्वगिवोज्झितास्य ।
तारामयं बीजभुजादसीयं
कालेन निष्ठ्यूतमिवास्थियूथम् ॥
पचेलिमं दाडिममर्कबिम्ब-
मुत्तार्य संध्या त्वगिवोज्झितास्य ।
तारामयं बीजभुजादसीयं
कालेन निष्ठ्यूतमिवास्थियूथम् ॥
मुत्तार्य संध्या त्वगिवोज्झितास्य ।
तारामयं बीजभुजादसीयं
कालेन निष्ठ्यूतमिवास्थियूथम् ॥
अन्वयः
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संध्या अस्य पचेलिमम् दाडिमम् (इव स्थितम्) अर्क-बिम्बम् उत्तार्य त्वक् इव उज्झिता। अदसीयम् तारामयम् अस्थि-यूथम् बीज-भुजा कालेन निष्ठ्यूतम् इव (अस्ति)।
Summary
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The evening twilight, having peeled off the sun's disc like a ripe pomegranate, has been discarded like its skin. This collection of stars seems like the multitude of seeds (bones) spat out by Time, the eater of the seeds.
पदच्छेदः
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| पचेलिमम् | पचेलिम (२.१) | ripe |
| दाडिमम् | दाडिम (२.१) | pomegranate |
| अर्क | अर्क | sun's |
| बिम्बम् | बिम्ब (२.१) | disc |
| उत्तार्थ | उत्तार्थ (उद्√तृ+ल्यप्) | having peeled off |
| संध्या | संध्या (१.१) | The evening twilight |
| त्वक् | त्वच् (१.१) | the skin |
| इव | इव | like |
| उज्झिता | उज्झित (√उझ्+क्त, १.१) | is discarded |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| तारामयम् | तारामय (१.१) | made of stars |
| बीज | बीज | seed |
| भुजा | भुज् (३.१) | by the eater |
| अदसीयम् | अदसीय (१.१) | this |
| कालेन | काल (३.१) | by Time |
| निष्ठ्यूतम् | निष्ठ्यूत (निस्√ष्ठिव्+क्त, १.१) | spat out |
| इव | इव | as if |
| अस्थि | अस्थि | of bones (seeds) |
| यूथम् | यूथ (१.१) | a collection |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | चे | लि | मं | दा | डि | म | म | र्क | बि | म्ब |
| मु | त्ता | र्य | सं | ध्या | त्व | गि | वो | ज्झि | ता | स्य |
| ता | रा | म | यं | बी | ज | भु | जा | द | सी | यं |
| का | ले | न | नि | ष्ठ्यू | त | मि | वा | स्थि | यू | थम् |
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