हर्यक्षीभवतः कुरङ्गमुदरे प्रक्षिप्य यद्वा शशं
जातस्फीततनोरमुष्य हरिता सूतस्य पत्न्या हरेः ।
भङ्गस्त्वद्वदनाम्बुजादजनि यत्पद्मात्तदेकाकिनः
स्यादेकः पुनरस्य स प्रतिभटो यः सिंहिकायाः सुतः ॥
हर्यक्षीभवतः कुरङ्गमुदरे प्रक्षिप्य यद्वा शशं
जातस्फीततनोरमुष्य हरिता सूतस्य पत्न्या हरेः ।
भङ्गस्त्वद्वदनाम्बुजादजनि यत्पद्मात्तदेकाकिनः
स्यादेकः पुनरस्य स प्रतिभटो यः सिंहिकायाः सुतः ॥
जातस्फीततनोरमुष्य हरिता सूतस्य पत्न्या हरेः ।
भङ्गस्त्वद्वदनाम्बुजादजनि यत्पद्मात्तदेकाकिनः
स्यादेकः पुनरस्य स प्रतिभटो यः सिंहिकायाः सुतः ॥
अन्वयः
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यद्वा, हरिता हरेः सूतस्य पत्न्या उदरे कुरङ्गम् शशम् वा प्रक्षिप्य हरि-अक्षी-भवतः जात-स्फीत-तनोः अमुष्य (चन्द्रस्य) यत् पद्मात् त्वत्-वदन-अम्बुजात् भङ्गः अजनि, तत् (युक्तम्) । एकाकिनः अस्य पुनः एकः सः प्रतिभटः स्यात् यः सिंहिकायाः सुतः (अस्ति) ।
Summary
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The moon, having grown large by swallowing a deer or hare, was defeated by your lotus-face. Now, this solitary moon has another rival: Rahu, the son of Simhika.
पदच्छेदः
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| हर्यक्षीभवतः | हर्यक्षीभवत् (६.१) | of the one becoming lion-eyed |
| कुरङ्गम् | कुरङ्ग (२.१) | deer |
| उदरे | उदर (७.१) | in the belly |
| प्रक्षिप्य | प्रक्षिप्य (प्र√क्षिप्+ल्यप्) | having thrown |
| यद्वा | यद्वा | or |
| शशम् | शश (२.१) | hare |
| जातस्फीततनोः | जातस्फीततनु (६.१) | of the one whose body has grown large |
| अमुष्य | अदस् (६.१) | of this (moon) |
| हरिता | हरित् (३.१) | by the green one |
| सूतस्य | सूत (६.१) | of the charioteer |
| पत्न्या | पत्नी (३.१) | by the wife |
| हरेः | हरि (६.१) | of the Sun |
| भङ्गः | भङ्ग (१.१) | defeat |
| त्वद्वदनाम्बुजात् | त्वद्वदनाम्बुज (५.१) | from your lotus-face |
| अजनि | अजनि (√जन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | happened |
| यत् | यद् | that |
| पद्मात् | पद्म (५.१) | from the lotus |
| तत् | तद् | therefore |
| एकाकिनः | एकाकिन् (६.१) | of the solitary one |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| एकः | एक (१.१) | one |
| पुनः | पुनर् | another |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| सः | तद् (१.१) | that |
| प्रतिभटः | प्रतिभट (१.१) | rival |
| यः | यद् (१.१) | who |
| सिंहिकायाः | सिंहिका (६.१) | of Simhika |
| सुतः | सुत (१.१) | the son (Rahu) |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | र्य | क्षी | भ | व | तः | कु | र | ङ्ग | मु | द | रे | प्र | क्षि | प्य | य | द्वा | श | शं |
| जा | त | स्फी | त | त | नो | र | मु | ष्य | ह | रि | ता | सू | त | स्य | प | त्न्या | ह | रेः |
| भ | ङ्ग | स्त्व | द्व | द | ना | म्बु | जा | द | ज | नि | य | त्प | द्मा | त्त | दे | का | कि | नः |
| स्या | दे | कः | पु | न | र | स्य | स | प्र | ति | भ | टो | यः | सिं | हि | का | याः | सु | तः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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