दशाननेनापि जगन्ति जित्वा
योऽयं पुरापारि न जातु जेतुम् ।
म्लानिर्विधोर्मानिनि संगतेयं
तस्य त्वदेकानननिर्जितस्य ॥
दशाननेनापि जगन्ति जित्वा
योऽयं पुरापारि न जातु जेतुम् ।
म्लानिर्विधोर्मानिनि संगतेयं
तस्य त्वदेकानननिर्जितस्य ॥
योऽयं पुरापारि न जातु जेतुम् ।
म्लानिर्विधोर्मानिनि संगतेयं
तस्य त्वदेकानननिर्जितस्य ॥
अन्वयः
AI
मानिनि, दशाननेन अपि जगन्ति जित्वा पुरा यः अयम् जातु जेतुम् न अपारि, त्वत्-एक-आनन-निर्जितस्य तस्य विधोः इयम् म्लानिः संगता ।
Summary
AI
O proud lady, this moon, which in the past even Ravana could not conquer after having conquered the worlds, is now waning. This fading has befallen it because it has been defeated by your face alone.
पदच्छेदः
AI
| दशाननेन | दशानन (३.१) | by Ravana |
| अपि | अपि | even |
| जगन्ति | जगत् (२.३) | the worlds |
| जित्वा | जित्वा (√जि+क्त्वा) | having conquered |
| यः | यद् (१.१) | who |
| अयम् | इदम् (१.१) | this (moon) |
| पुरा | पुरा | in the past |
| अपारि | अपारि (√पॄ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was able |
| न | न | not |
| जातु | जातु | ever |
| जेतुम् | जेतुम् (√जि+तुमुन्) | to conquer |
| म्लानिः | म्लानि (१.१) | fading |
| विधोः | विधु (६.१) | of the moon |
| मानिनि | मानिनी (८.१) | O proud lady |
| संगता | संगत (सम्√गम्+क्त, १.१) | has befallen |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| त्वदेकानननिर्जितस्य | त्वत्–एक–आनन–निर्जित (निर्√जि+क्त, ६.१) | who has been conquered by your face alone |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | शा | न | ने | ना | पि | ज | ग | न्ति | जि | त्वा |
| यो | ऽयं | पु | रा | पा | रि | न | जा | तु | जे | तुम् |
| म्ला | नि | र्वि | धो | र्मा | नि | नि | सं | ग | ते | यं |
| त | स्य | त्व | दे | का | न | न | नि | र्जि | त | स्य |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.