मृगाक्षि यन्मण्डलमेतदिन्दोः
स्मरस्य तत्पाण्डुरमातपत्रम् ।
यः पूर्णिमानन्तरमस्य भङ्गः
स च्छत्त्रभङ्गः खलु मन्मथस्य ॥
मृगाक्षि यन्मण्डलमेतदिन्दोः
स्मरस्य तत्पाण्डुरमातपत्रम् ।
यः पूर्णिमानन्तरमस्य भङ्गः
स च्छत्त्रभङ्गः खलु मन्मथस्य ॥
स्मरस्य तत्पाण्डुरमातपत्रम् ।
यः पूर्णिमानन्तरमस्य भङ्गः
स च्छत्त्रभङ्गः खलु मन्मथस्य ॥
अन्वयः
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मृगाक्षि, इन्दोः यत् एतत् मण्डलम् (अस्ति), तत् स्मरस्य पाण्डुरम् आतपत्रम् (अस्ति) । पूर्णिमा-अनन्तरम् अस्य यः भङ्गः (भवति), सः खलु मन्मथस्य छत्रभङ्गः (भवति) ।
Summary
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O deer-eyed one, this orb of the moon is the pale white royal parasol of Cupid. The waning of the moon after the full moon is indeed the breaking of Cupid's parasol, signifying his defeat.
पदच्छेदः
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| मृगाक्षि | मृगाक्षी (८.१) | O deer-eyed one |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| मण्डलम् | मण्डल (१.१) | orb |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| इन्दोः | इन्दु (६.१) | of the moon |
| स्मरस्य | स्मर (६.१) | of Smara (Cupid) |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| पाण्डुरम् | पाण्डुर (१.१) | pale white |
| आतपत्रम् | आतपत्र (१.१) | parasol |
| यः | यद् (१.१) | which |
| पूर्णिमानन्तरम् | पूर्णिमानन्तरम् | after the full moon |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| भङ्गः | भङ्ग (१.१) | waning/breaking |
| सः | तद् (१.१) | that |
| छत्त्रभङ्गः | छत्र–भङ्ग (१.१) | the breaking of the umbrella |
| खलु | खलु | indeed |
| मन्मथस्य | मन्मथ (६.१) | of Manmatha (Cupid) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मृ | गा | क्षि | य | न्म | ण्ड | ल | मे | त | दि | न्दोः |
| स्म | र | स्य | त | त्पा | ण्डु | र | मा | त | प | त्रम् |
| यः | पू | र्णि | मा | न | न्त | र | म | स्य | भ | ङ्गः |
| स | च्छ | त्त्र | भ | ङ्गः | ख | लु | म | न्म | थ | स्य |
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