स्वधाकृतं यत्तनयैः पितृभ्यः
श्रद्धापवित्रं तिलचित्रमम्भः ।
चन्द्रं पितृस्थानतयोपतस्थे
तदङ्करोचिःखचिता सुधैव ॥
स्वधाकृतं यत्तनयैः पितृभ्यः
श्रद्धापवित्रं तिलचित्रमम्भः ।
चन्द्रं पितृस्थानतयोपतस्थे
तदङ्करोचिःखचिता सुधैव ॥
श्रद्धापवित्रं तिलचित्रमम्भः ।
चन्द्रं पितृस्थानतयोपतस्थे
तदङ्करोचिःखचिता सुधैव ॥
अन्वयः
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यत् श्रद्धा-पवित्रम् तिल-चित्रम् अम्भः तनयैः पितृभ्यः स्वधा-कृतम्, तत् अङ्क-रोचिः-खचिता सुधा एव (भूत्वा) पितृ-स्थानतया चन्द्रम् उपतस्थे ।
Summary
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The water, purified by faith and mixed with sesame seeds, which is offered by sons to their ancestors, reaches the moon, the abode of the ancestors. It becomes the very nectar of the moon, appearing as if studded with the rays from its dark spot (the sesame seeds).
पदच्छेदः
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| स्वधा | स्वधा | oblation |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | made |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| तनयैः | तनय (३.३) | by sons |
| पितृभ्यः | पितृ (४.३) | to the ancestors |
| श्रद्धा | श्रद्धा | faith |
| पवित्रम् | पवित्र (१.१) | purified |
| तिल | तिल | sesame |
| चित्रम् | चित्र (१.१) | mixed with |
| अम्भः | अम्भस् (१.१) | water |
| चन्द्रम् | चन्द्र (२.१) | the moon |
| पितृ | पितृ | of the ancestors |
| स्थानतया | स्थानता (३.१) | by being the abode |
| उपतस्थे | उपतस्थे (उप√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | reached |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| अङ्क | अङ्क | spot's |
| रोचिः | रोचिस् | rays |
| खचिता | खचित (१.१) | studded with |
| सुधा | सुधा (१.१) | nectar |
| एव | एव | itself |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | धा | कृ | तं | य | त्त | न | यैः | पि | तृ | भ्यः |
| श्र | द्धा | प | वि | त्रं | ति | ल | चि | त्र | म | म्भः |
| च | न्द्रं | पि | तृ | स्था | न | त | यो | प | त | स्थे |
| त | द | ङ्क | रो | चिः | ख | चि | ता | सु | धै | व |
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