निरन्तरत्वेन निधाय तन्वि
तारासहस्राणि यदि क्रियेत ।
सुधांशुरन्यः स कलङ्कमुक्त-
स्तदा त्वदास्यश्रियमाश्रयेत ॥
निरन्तरत्वेन निधाय तन्वि
तारासहस्राणि यदि क्रियेत ।
सुधांशुरन्यः स कलङ्कमुक्त-
स्तदा त्वदास्यश्रियमाश्रयेत ॥
तारासहस्राणि यदि क्रियेत ।
सुधांशुरन्यः स कलङ्कमुक्त-
स्तदा त्वदास्यश्रियमाश्रयेत ॥
अन्वयः
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तन्वि, यदि तारा-सहस्राणि निरन्तरत्वेन निधाय अन्यः कलङ्क-मुक्तः सुधांशुः क्रियेत, तदा सः त्वत्-आस्य-श्रियम् आश्रयेत ।
Summary
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O slender one, if another moon, free from any spot, were to be made by compactly putting together thousands of stars, only then would it be able to rival the beauty of your face.
पदच्छेदः
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| निरन्तरत्वेन | निरन्तरत्व (३.१) | with compactness |
| निधाय | निधाय (नि√धा+ल्यप्) | having placed together |
| तन्वि | तन्वी (८.१) | O slender one |
| तारा | तारा | stars |
| सहस्राणि | सहस्र (२.३) | thousands of |
| यदि | यदि | if |
| क्रियेत | क्रियेत (√कृ भावकर्मणोः विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | were to be made |
| सुधांशुः | सुधांशु (१.१) | a moon |
| अन्यः | अन्य (१.१) | another |
| सः | तद् (१.१) | that one |
| कलङ्क | कलङ्क | from the spot |
| मुक्तः | मुक्त (√मुच्+क्त, १.१) | freed |
| तदा | तदा | then |
| त्वत् | युष्मद् | your |
| आस्य | आस्य | face's |
| श्रियम् | श्री (२.१) | beauty |
| आश्रयेत | आश्रयेत (आ√श्रि कर्तरि विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | would resort to |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र | न्त | र | त्वे | न | नि | धा | य | त | न्वि |
| ता | रा | स | ह | स्रा | णि | य | दि | क्रि | ये | त |
| सु | धां | शु | र | न्यः | स | क | ल | ङ्क | मु | क्त |
| स्त | दा | त्व | दा | स्य | श्रि | य | मा | श्र | ये | त |
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